महाराष्ट्र सरकार ने एटीएफ पर वैट घटाकर 7% किया, घरेलू एयरलाइनों को समर्थन
सुप्रीम कोर्ट में याचिका का निपटारा
एक याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में यह शिकायत की कि त्योहारों के दौरान एयरलाइनों ने किराए में सात गुना तक वृद्धि कर दी है। उन्होंने न्यायालय से तात्कालिक सुनवाई की मांग की। हालांकि, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि "हवाई यात्रा से बचें"। यह एक समाधान है। जब सेवाएं उपलब्धता से बाहर हो जाती हैं, तो उनका उपयोग न करने का सुझाव दिया गया है। इसी तरह का संदेश केंद्र सरकार ने भी दिया है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 'भारतीय वायुयान नियम-2026' जारी किए हैं, जिनके तहत एयरलाइन टिकट की कीमतों को नियंत्रित करने से बचा गया है। किराए का निर्धारण अब 'मुख्य रूप से' बाजार की शक्तियों पर निर्भर करेगा।
ये नए नियम एक जनवरी 2027 से लागू होंगे। इसके अंतर्गत एयरलाइंस अपनी परिचालन लागत और अन्य कारकों के आधार पर किराए निर्धारित करती रहेंगी। उल्लेखनीय है कि जुलाई 2025 में जारी प्रारंभिक मसौदे में किराए निर्धारण की विस्तृत प्रणाली का प्रस्ताव था, लेकिन अंतिम नियमों में इसे हटा दिया गया।
हालांकि, सरकार ने कहा है कि "असाधारण परिस्थितियों" में किराए में हस्तक्षेप करने का अधिकार सुरक्षित रखा गया है, लेकिन इन परिस्थितियों की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है। यात्रियों के लिए राहत की बात यह है कि नए नियमों के लागू होने के बाद सभी एयरलाइंस को अपनी वेबसाइटों और डिजिटल प्लेटफार्मों पर टिकट की कुल कीमत, कर, शुल्क, रद्दीकरण शुल्क और रिफंड की शर्तों का विस्तृत विवरण प्रदान करना होगा।
हालांकि, मांग के समय यात्रियों की कीमत पर मनमाना लाभ कमाने की प्रवृत्ति पर कोई रोक नहीं लगेगी। बाजार में प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित होने पर ही कीमतों का निर्धारण उचित होता है। एक या दो कंपनियों के एकाधिकार की स्थिति में यह तर्क उत्पीड़क हो जाता है। यह दुखद है कि प्रभावित लोगों को सेवाओं का उपयोग न करने की असंवेदनशील सलाह दी जा रही है!
