महिला IAS अधिकारियों की बढ़ती भूमिका यूपी स्वास्थ्य विभाग में
महिलाओं की संवेदनशीलता से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार
लखनऊ। यूपी स्वास्थ्य विभाग में महिलाओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जो संवेदनशीलता, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर समझती हैं। यह बदलाव महिला IAS अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है, जो सीधे तौर पर आम जनता से जुड़े इस विभाग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
महिला अधिकारियों की तैनाती चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, मेडिकल शिक्षा और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में की जा रही है, लेकिन पुरुष अधिकारियों को पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है। हालांकि, महिला अधिकारियों के प्रति कई बार शिकायतें भी सामने आती हैं, जिसमें मंत्री और जनप्रतिनिधियों की सुनवाई न करने की बातें शामिल हैं। ऐसे में यूपी स्वास्थ्य विभाग के मंत्री और डिप्टी सीएम के लिए यह एक चुनौती बन सकती है।
स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से खींचतान चल रही है। डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के प्रयासों के बावजूद, विभाग में ऐसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं जो उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। अब यह देखना होगा कि क्या स्वास्थ्य विभाग में कोई बड़ा बदलाव होता है या स्थिति पहले जैसी बनी रहती है।
जिलों में तैनात महिला अधिकारियों के खिलाफ अक्सर शिकायतें आती रहती हैं, जिसमें फोन न उठाने की भी शिकायतें शामिल हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वास्थ्य विभाग की महिला अधिकारियों के प्रति क्या प्रतिक्रियाएं आती हैं। चर्चा है कि सरकार के इस कदम से विभाग के मंत्री को बड़ा झटका लगा है।
हाल ही में उत्तर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक फेरबदल के बाद वरिष्ठ स्तर पर महिला IAS अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। 20 सितंबर 2026 को हुए फेरबदल में वी. हेकेली झिमोमी को प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले यह जिम्मेदारी अमित कुमार घोष के पास थी।
