Newzfatafatlogo

महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान की आवश्यकता: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर एक बैठक में महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने जागरूकता अभियान चलाने, पॉस्को अधिनियम के प्रति जागरूकता बढ़ाने और एचपीवी टीकाकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने ऑनलाइन शिकायत प्रणाली को मजबूत करने और वन स्टॉप सेंटरों की व्यवस्थाओं की समीक्षा करने की बात की। जानें उनके विचार और सुझावों के बारे में विस्तार से।
 | 

महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा पर चर्चा

मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को दिल्ली महिला आयोग की बैठक में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि केवल कानून बनाने से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि महिलाओं को उनके अधिकारों और सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक करना भी आवश्यक है।


बैठक में आयोग की अध्यक्ष श्रीमती लता गुप्ता और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। मुख्यमंत्री ने कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं को साइबर अपराधों से बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि छात्राओं को ऑनलाइन उत्पीड़न, सोशल मीडिया के दुरुपयोग, साइबर ठगी और अन्य डिजिटल अपराधों से बचने के उपायों की जानकारी दी जाए।


पॉस्को और एचपीवी टीकाकरण पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बालिकाओं को उनके अधिकारों और यौन अपराधों से सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधानों की जानकारी होना आवश्यक है। उन्होंने पॉस्को अधिनियम के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में अभियान चलाने का सुझाव दिया।


सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी टीकाकरण के महत्व पर भी उन्होंने जोर दिया और कहा कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जरूरतमंद किशोरियों तक यह सुविधा पहुंचाई जाए।


महिला शिकायतों का समाधान

मुख्यमंत्री ने महिला आयोग की ऑनलाइन शिकायत प्रणाली को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा, मानव तस्करी, यौन शोषण और उत्पीड़न जैसी शिकायतों के लिए महिलाओं को सरल और भरोसेमंद व्यवस्था मिलनी चाहिए।


आयोग की कार्यप्रणाली को महिलाओं की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप और अधिक प्रभावी बनाने की सलाह दी गई।


वन स्टॉप सेंटरों का दौरा

मुख्यमंत्री ने संकट में महिलाओं की सहायता के लिए वन स्टॉप सेंटरों और महिला आश्रय संस्थानों का दौरा कर व्यवस्थाओं की समीक्षा करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में रहने वाली महिलाओं को सुरक्षित वातावरण और आवश्यक चिकित्सा, कानूनी सहायता, और पुनर्वास संबंधी सुविधाएं मिलनी चाहिए।