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मायावती ने आकाश आनंद को BSP से निकाला, अशोक सिद्धार्थ पर भी साधा निशाना

बीएसपी प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह अलग करने का निर्णय लिया है। यह कदम उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच उठाया गया है। मायावती ने इस फैसले के पीछे अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के निर्णय को भी जोड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धार्थ ने व्यक्तिगत हितों को पार्टी के हितों से ऊपर रखा। इस घटनाक्रम में आकाश आनंद की प्राथमिकताओं और उनकी पार्टी के प्रति निष्ठा पर भी सवाल उठाए गए हैं। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के सभी पहलुओं के बारे में।
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आकाश आनंद की पार्टी से छुट्टी


बीएसपी की प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह अलग करने का निर्णय लिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही हैं। मायावती ने 9 सितंबर को सोशल मीडिया पर इस निर्णय के पीछे की वजह बताई। उन्होंने आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के निर्णय को ‘देर आए, दुरुस्त आए’ कहा। मायावती ने आरोप लगाया कि सिद्धार्थ ने व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों को पार्टी के हितों से ऊपर रखा।


पद से हटने के बाद पार्टी से भी अलग

आकाश आनंद के खिलाफ यह निर्णय अचानक नहीं आया। 3 सितंबर 2026 को मायावती ने उन्हें BSP के चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद से हटा दिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि आकाश को और राजनीतिक परिपक्वता की आवश्यकता है। यह तीसरी बार था जब आकाश को पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से हटाया गया। इसके बाद, 7 सितंबर को मायावती ने आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद को अन्य राज्यों के लिए चीफ सेक्टर कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया। अब, 9 सितंबर के बयान में, मायावती ने आकाश को पार्टी में किसी जिम्मेदारी से हटाने के बजाय उन्हें पूरी तरह ‘मुक्त’ करने की बात कही।


मायावती ने अशोक सिद्धार्थ पर भी निशाना साधा

मायावती ने अपनी पोस्ट में अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास के निर्णय पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय देर से लिया गया, लेकिन सही है। अगर सिद्धार्थ ने पहले यह कदम उठाया होता, तो BSP और बहुजन समाज को कई कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता। मायावती का आरोप है कि सिद्धार्थ की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पार्टी के हितों से टकराती रही हैं।


निजी स्वार्थ से ऊपर उठने की आवश्यकता

मायावती ने BSP की राजनीतिक विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी की राजनीति बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर और कांशीराम के त्याग और संघर्ष से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि नेताओं और कार्यकर्ताओं को निजी स्वार्थ और पारिवारिक हितों से ऊपर उठकर काम करना होगा। यह टिप्पणी सीधे तौर पर अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद से संबंधित मानी जा रही है।


आकाश आनंद की प्राथमिकताएं पर सवाल

मायावती ने आकाश आनंद के प्रति भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर आकाश को BSP और बहुजन आंदोलन के हितों की चिंता है, तो उन्हें अपने राजनीतिक करियर को प्राथमिकता देनी चाहिए। मायावती ने यह भी कहा कि आकाश ने उनके X अकाउंट पर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास की पोस्ट को रिपोस्ट नहीं किया, जिससे यह सवाल उठता है कि आकाश पार्टी के हितों को लेकर कितने गंभीर हैं।


डबल माइंड होकर पार्टी का भला कैसे करेंगे?

मायावती ने आकाश आनंद की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर पारिवारिक रिश्तों और पार्टी के हितों के बीच टकराव बना रहता है, तो वह प्रभावी ढंग से काम कैसे कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर आकाश निजी रिश्तों को पार्टी के हितों से ज्यादा महत्व देते हैं, तो वह पार्टी के लिए कैसे प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।