मालदा में अदीना मस्जिद के बाहर शिवलिंग स्थापना पर धार्मिक विवाद गहराया
मालदा में धार्मिक तनाव का नया मोड़
मालदा: पश्चिम बंगाल के मालदा में 650 साल पुरानी अदीना मस्जिद के बाहर एक विशाल शिवलिंग स्थापित करने की योजना ने धार्मिक विवाद को जन्म दिया है। हिंदू संगठनों ने सावन के दूसरे सोमवार को पूजा करने की तैयारी की है, जबकि मुस्लिम संगठनों ने प्रशासन से मौजूदा स्थिति को बनाए रखने की मांग की है। इस बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है।
तारकेश्वर से लाया गया शिवलिंग
सूत्रों के अनुसार, हुगली जिले के तारकेश्वर से लगभग 3.6 फीट ऊंचा और 1.5 टन वजनी शिवलिंग मालदा लाया गया है। इसे अदीना मस्जिद के परिसर के बाहर स्थापित करने की योजना है। आयोजकों का कहना है कि सावन के दूसरे सोमवार को शिवलिंग की स्थापना के बाद विधिपूर्वक पूजा की जाएगी।
मुस्लिम संगठनों का विरोध
शिवलिंग की स्थापना की घोषणा के बाद कुछ मुस्लिम नेताओं और संगठनों ने इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि अदीना मस्जिद एक ऐतिहासिक स्थल है और यहां किसी भी नए धार्मिक आयोजन से पहले प्रशासन को मौजूदा स्थिति बनाए रखनी चाहिए। मुस्लिम संगठनों ने प्रशासन से हस्तक्षेप करने और नई गतिविधियों को रोकने की मांग की है। उनका मानना है कि इस तरह के कदम से इलाके में तनाव बढ़ सकता है।
सुरक्षा व्यवस्था में वृद्धि
विवाद के बढ़ने के बाद, जिला प्रशासन और पुलिस ने इलाके की सुरक्षा को कड़ा कर दिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी गैरकानूनी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन का कहना है कि कानून के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी और शांति व्यवस्था को बनाए रखा जाएगा। स्थानीय प्रशासन दोनों पक्षों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है।
एएसआई के नियमों का महत्व
अदीना मस्जिद को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक माना जाता है। ऐसे स्मारकों में धार्मिक गतिविधियों के लिए विशेष नियम लागू होते हैं। अधिकारियों के अनुसार, बिना अनुमति किसी भी नई धार्मिक गतिविधि पर कार्रवाई की जा सकती है। इस कारण शिवलिंग की स्थापना को लेकर प्रशासन के सामने ऐतिहासिक स्मारक से जुड़े नियमों का पालन कराने की चुनौती है।
धार्मिक और ऐतिहासिक दावे
हिंदू संगठन अदीना मस्जिद के इतिहास को लेकर अलग दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि 1373 ईस्वी में बनी इस इमारत का निर्माण एक प्राचीन शिव मंदिर को तोड़कर किया गया था। इसी दावे के आधार पर वे शिवलिंग स्थापित करने की बात कर रहे हैं। हालांकि, इस दावे पर विभिन्न पक्षों की अलग-अलग राय है, जिससे मामला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रह गया है।
प्रशासन की चुनौती
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि धार्मिक भावनाओं, ऐतिहासिक स्मारक से जुड़े नियमों और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखा जाए। सावन के दूसरे सोमवार को प्रस्तावित पूजा और शिवलिंग स्थापना को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस विवादित मामले में आगे क्या कदम उठाता है।
