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मुंबई में बारिश के कारण चॉल ढहने से छह लोगों की मौत

मुंबई में लगातार बारिश के कारण मानखुर्द के जनता नगर में एक तीन मंजिला चॉल ढह गई, जिससे छह लोगों की जान चली गई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। राहत कार्य में एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियां जुटी हुई हैं। विधायक अबू आजमी ने अवैध निर्माण के मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। इस घटना ने शहर में सुरक्षा और निर्माण मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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मुंबई में बारिश का कहर

मुंबई- लगातार हो रही बारिश ने मुंबई में जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। मानखुर्द के जनता नगर क्षेत्र में एक तीन मंजिला चॉल गिरने से पांच बच्चों और एक महिला सहित कुल छह लोगों की जान चली गई। इस घटना पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गहरा दुख व्यक्त किया है।


मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी एक पोस्ट में कहा गया, "मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मानखुर्द में घर गिरने की घटना में छह लोगों की मौत पर गहरा दुख जताया है और मृतकों को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने कहा कि हम उनके परिवारों के दुख में शामिल हैं और मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।"


मुंबई के मेयर ऑफिस से मिली जानकारी के अनुसार, मानखुर्द के जनता नगर में चॉल के ढहने से यह हादसा हुआ। एक व्यक्ति घायल हो गया है, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, पुलिस और बीएमसी की बचाव टीमों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया। मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने प्रभावित परिवारों से मिलने के लिए गोवंडी अस्पताल का दौरा किया।


महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि भारी बारिश के कारण यह इमारत ढह गई। उन्होंने कहा कि राहत एवं बचाव कार्य में एनडीआरएफ, पुलिस और अन्य एजेंसियां जुटी हुई हैं। महाजन ने यह भी कहा कि इलाके में अवैध निर्माण हुए हैं और इस घटना की जांच कराई जाएगी।


समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने कहा कि 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी ने झोपड़ियों के पुनर्वास की घोषणा की थी। उन्होंने सवाल उठाया कि 1995 के बाद इतनी बड़ी संख्या में झोपड़ियां कैसे बनीं। आजमी ने आरोप लगाया कि पैसे लेकर झोपड़ियों का निर्माण किया जाता है। उन्होंने मांग की कि जर्जर झोपड़ियों को हटाकर वहां रहने वालों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया जाए।