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मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर प्रदर्शन: 10 अक्टूबर की तैयारी

देशभर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के लिए पुलिस ने अनुमति की शर्तें निर्धारित की हैं। इस लेख में जानें कि प्रदर्शन के दौरान क्या नियम लागू होंगे और उल्लंघन की स्थिति में क्या कार्रवाई की जा सकती है। जानें BNSS की धारा 163 का महत्व और इसके तहत संभावित सजा के बारे में भी।
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प्रदर्शनों की तैयारी

देशभर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। 10 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के नेताओं और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बनाई गई है। जंतर मंतर पर होने वाले इस प्रदर्शन के लिए पुलिस ने कहा है कि आयोजकों को 10 दिन पहले अनुमति लेनी होगी और भीड़ की संख्या 1,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए। प्रदर्शनकारी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रहे हैं, जिन पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में धांधली के आरोप लगे हैं। इसके अलावा, उन पर यह भी आरोप है कि वे अपने सहयोगियों की सलाह नहीं लेते और मनमाने निर्णय लेते हैं.


पुलिस की चेतावनी

पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जंतर मंतर क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNNS) की धारा 163 लागू है, जिसके तहत प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी। दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है। CJP भी 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है। धारा 163 के तहत आदेश 21 अक्टूबर तक प्रभावी रहेंगे, इसलिए पुलिस प्रदर्शनों की अनुमति नहीं देगी। CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने संसद मार्ग थाने में इंटिमेशन लेटर दिया है, जिसमें कहा गया है कि हजारों लोग इसमें शामिल होंगे। इससे पहले, चुनाव आयोग के पास मार्च और आकाशवाणी भवन में 8 घंटे से अधिक धरने के बाद सैकड़ों विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था.


10 अक्टूबर को प्रदर्शन की स्थिति

यदि प्रदर्शनकारी 10 अक्टूबर को निर्धारित स्थान पर पहुंचते हैं, तो उन पर धारा 163 के उल्लंघन का आरोप लगाया जा सकता है। यह धारा निषेधाज्ञा से संबंधित है और जंतर मंतर के आसपास के क्षेत्रों में 2 अक्टूबर से लागू है। पुलिस ने जंतर मंतर पर प्रदर्शनों के लिए BNS की धारा 223 के साथ सरकारी कर्मचारियों के कार्य में बाधा डालने से संबंधित धाराएं भी लगाई हैं.


BNSS की धारा 163 का महत्व

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड, विशाल अरुण मिश्रा के अनुसार, BNSS की धारा 163 निषेधाज्ञा से संबंधित है और यह पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 की जगह लागू हुई है। यह आदेश उन मामलों में दिया जाता है जहां उपद्रव या खतरे की आशंका होती है और तात्कालिक कार्रवाई आवश्यक होती है.


धारा 163 का उपयोग

विशाल अरुण मिश्रा ने बताया कि आमतौर पर इस धारा का उपयोग भीड़, जुलूस और धरना-प्रदर्शन पर रोक लगाने के लिए किया जाता है। इसमें पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस, धरना, नारेबाजी और भाषण पर रोक है। प्रतिबंधित क्षेत्रों में हथियार, बैनर, प्लेकार्ड, लाठी और डंडे ले जाना भी मना है.


उल्लंघन पर कार्रवाई

विशाल अरुण मिश्रा ने कहा कि धारा 163 स्वयं सजा निर्धारित नहीं करती, लेकिन आदेश का उल्लंघन करने पर BNS की धारा 223 लगाई जाती है। यह किसी लोकसेवक द्वारा जारी आदेश की अवहेलना से संबंधित है और इसकी सजा पहले से अधिक सख्त है.


संभावित सजा

अगर आदेश के उल्लंघन से किसी वैध कार्य में लगे व्यक्ति को नुकसान होता है, तो छह महीने तक की साधारण कैद या 2,500 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यदि इससे मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा होता है, तो एक साल तक की कैद या 5,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.


आदेश की अवधि

विशाल अरुण मिश्रा ने बताया कि धारा 163 का आदेश आमतौर पर दो महीने से अधिक लागू नहीं रह सकता। राज्य सरकार इसे छह महीने तक बढ़ा सकती है। प्रभावित व्यक्ति मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन देकर इसे रद्द या बदलने की मांग कर सकता है.


2 अक्टूबर के प्रदर्शन में कार्रवाई

दिल्ली पुलिस ने 2 अक्टूबर को जंतर मंतर और आसपास के क्षेत्रों में हुए प्रदर्शनों में BNSS की धारा 163 के तहत लगाए गए प्रतिबंधात्मक आदेश के उल्लंघन पर तीन FIR दर्ज की हैं। दो FIR संसद मार्ग थाने में और एक कनॉट प्लेस थाने में दर्ज की गई हैं. पुलिस सूत्रों के अनुसार, FIR में BNS की धारा 223 के साथ सरकारी कर्मचारियों के कार्य में बाधा डालने से संबंधित प्रावधान लगाए गए हैं.