मुख्यमंत्री ने बोह क्षेत्र में आपदा प्रभावित परिवारों के लिए राहत कार्यों का निरीक्षण किया
मुख्यमंत्री का दौरा और राहत कार्यों की समीक्षा
धर्मशाला(गौरव सूद) : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के बोह में बादल फटने से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने राहत एवं पुनर्वास कार्यों का जायजा लिया और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बोह में स्थापित राहत शिविर का निरीक्षण किया। इस दौरान, उन्होंने वहां ठहरे प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उनकी स्थिति का पता लगाया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन परिवारों के घर इस आपदा में पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें मकान निर्माण के लिए 7.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा, कपड़े, बर्तन और अन्य आवश्यक घरेलू सामान की खरीद के लिए एक लाख रुपये की सहायता भी प्रदान की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जिन प्रभावित परिवारों के पास रहने के लिए भूमि नहीं है, उन्हें सरकारी भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि जिन परिवारों की गाय या भैंस इस आपदा में मरी हैं, उन्हें 55 हजार रुपये प्रति पशु और जिनकी बकरियां मरी हैं, उन्हें 15 हजार रुपये प्रति बकरी की सहायता राशि दी जाएगी। जिन घरों में बाढ़ या आपदा का पानी घुसने से नुकसान हुआ है, उन्हें एक लाख रुपये की राहत दी जाएगी। इसी तरह, क्षतिग्रस्त दुकानों के लिए 50 हजार से एक लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी। किसानों को फसलों के नुकसान के लिए 5 हजार रुपये प्रति कनाल मुआवजा दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों को अस्थायी रूप से किराए के मकान में रहना पड़ेगा, उन्हें 5 हजार रुपये प्रति माह किराया सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही, प्रभावित परिवारों को छह महीने का राशन भी निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। इस अवसर पर, उन्होंने रिडकमार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अपग्रेड करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2023-24 की आपदा के दौरान प्रदेश में 23 हजार से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए थे और लगभग 500 लोगों की मृत्यु हुई थी। उस कठिन समय में, प्रदेश सरकार ने 75 हजार से अधिक लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू किया था, जिसकी सराहना नीति आयोग और विश्व बैंक ने की थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में 21वें स्थान से पांचवें स्थान पर पहुंचा है।
मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रभावित परिवार को अकेला महसूस करने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं हिमाचल प्रदेश के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। इसलिए, राज्य सरकार केवल राहत कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में होने वाले नुकसान को कम करने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं पर भी कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 3,500 करोड़ रुपये की लागत से आपदा-रोधी आधारभूत ढांचे के विकास का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार राज्य सरकार ने आपदा राहत नियमों में संशोधन करते हुए प्रभावित परिवारों को दी जाने वाली सहायता राशि में वृद्धि की है। अब पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 7 लाख रुपये, आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 1 लाख रुपये और दुकान या ढाबा क्षतिग्रस्त होने पर भी 1 लाख रुपये की सहायता दी जा रही है। इसके अलावा, संकट की घड़ी में प्रभावित परिवारों को शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए विशेष आपदा राहत कोष का गठन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करते हुए 25 परिवारों को 25-25 हजार रुपये और 16 अन्य परिवारों को 10-10 हजार रुपये की अंतरिम सहायता राशि जारी की गई है। पुनर्वास कार्यों में प्रशासन तेजी से जुटा हुआ है। अब तक 13 राजस्व प्रमाण पत्र तैयार किए जा चुके हैं और प्रभावित परिवारों के बोनाफाइड प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के पुनःनिर्माण की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय सेना, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय लोगों के प्रयासों की सराहना की।
उल्लेखनीय है कि घुड़घुं, भंगार और सपेड़ा गांवों के कुल 25 परिवार इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। इनमें घुड़घुं गांव के 11 मकानों से जुड़े 18 परिवारों के 52 सदस्य, भंगार गांव के एक मकान से जुड़े 3 परिवारों के 16 सदस्य और सपेड़ा गांव के 4 मकानों से जुड़े 4 परिवारों के 16 सदस्य शामिल हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सपेड़ा गांव के 13 मकानों को डेंजर जोन घोषित किया गया है। इस अवसर पर शाहपुर के विधायक एवं उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक राठौर, वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज कुमार, स्थानीय पंचायत प्रधान नीलम कुमारी, उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
