मुरादाबाद में अग्नि सुरक्षा के लिए प्रशासन की सख्त कार्रवाई
मुरादाबाद प्रशासन की सुरक्षा पहल
मुरादाबाद:- लखनऊ में हाल ही में हुए अग्निकांड के बाद, मुरादाबाद प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल के नेतृत्व में, जिले के लगभग 40 प्रमुख कोचिंग सेंटरों और व्यावसायिक संस्थानों का सुरक्षा ऑडिट किया जा रहा है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी डॉ. राजीव कुमार पांडे की अगुवाई में बनी पांच विशेष टीमों ने अब तक 35 संस्थानों की जांच पूरी कर ली है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनता की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसी सख्ती के तहत, मानकों की अनदेखी करने वाले एक संस्थान को तुरंत सील कर दिया गया है। अगले एक सप्ताह तक यह जांच अभियान जारी रहेगा।
बेसमेंट में व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रतिबंध
बेसमेंट में कोचिंग सेंटर, अस्पताल किसी भी व्यावसायिक गतिविधियां पूर्णतः प्रतिबंधित:-
प्रशासन ने बेसमेंट में चलने वाली गतिविधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों ने बताया कि बेसमेंट में अस्पताल, रेस्टोरेंट और कोचिंग सेंटर का संचालन आम जनता के लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए इन्हें पूरी तरह से बंद किया जाएगा। इसके अलावा, गैस सिलेंडर से होने वाले हादसों को रोकने के लिए पीएनजी के उपयोग पर जोर दिया गया है। पुरानी और लटकती बिजली की वायरिंग को तुरंत ठीक करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कोचिंग संस्थान की सीलिंग
बिल्डिंग कोड की अनदेखी पर कोचिंग संस्थान सील :-
जांच के दौरान एक ग्राउंड प्लस टू इमारत में संचालित कोचिंग संस्थान में 'नेशनल बिल्डिंग कोड 2016' के मानकों का पालन नहीं पाया गया। यहां अग्नि सुरक्षा के उचित इंतजाम नहीं थे और हाइड्रेंट व होजरील मानक के अनुरूप नहीं थे। इस गंभीर लापरवाही के चलते संस्थान को सील कर दिया गया। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि शीशे से पूरी तरह पैक इमारतों और एमडीए से पास नक्शे के विपरीत निर्माण करने वालों पर अब बिना नोटिस के कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा मानकों के लिए निर्देश
250 संचालकों को हिदायत और पांच टीमों का अभियान:-
डीएम और एसएसपी ने जिले के लगभग 250 कोचिंग, होटल और लॉन संचालकों के साथ एक लंबी बैठक की, जिसमें उन्हें 100 प्रतिशत सुरक्षा मानक पूरे करने की हिदायत दी गई। प्रशासन की पांच टीमें डीआईओएस की सूची में शामिल 40 बड़े संस्थानों के साथ-साथ तंग गलियों में चल रहे छोटे सेंटरों की पहचान कर रही हैं। छोटे संस्थानों में अग्निशामक यंत्र पाए जाने पर, स्टाफ को आपात स्थिति में उनका उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मॉक ड्रिल और इमरजेंसी नंबर
मॉक ड्रिल और इमरजेंसी नंबर चस्पा करना अनिवार्य:-
सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सभी संस्थानों में सक्रिय फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और बहुमंजिला इमारतों पर लाइटनिंग कंडक्टर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। हर परिसर में एंट्री-एग्जिट प्लान के साथ फायर ब्रिगेड (101), पुलिस (112) और एंबुलेंस (108) के नंबर स्पष्ट रूप से चस्पा होने चाहिए। किसी भी ऑटोमैटिक गेट को इमरजेंसी निकास नहीं माना जाएगा। साथ ही, स्टाफ को 'मॉक ड्रिल' कराने और आपदा से पूर्व अलर्ट करने वाले 'सचेत ऐप' को डाउनलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्माण नियमों का पालन
बैठक के दौरान उपाध्यक्ष मुरादाबाद विकास प्राधिकरण श्री अनुभव सिंह ने कहा कि कोई भी बिल्डिंग बनाने से पहले विकास प्राधिकरण के नियमों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। यह गलत है और ऐसे अनधिकृत निर्माण के खिलाफ विकास प्राधिकरण द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है।
