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मुरासु चक्रवात का आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ना: क्या कहता है मौसम विभाग?

मुरासु चक्रवात बंगाल की खाड़ी में विकसित होकर आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ रहा है, जिससे भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि यह चक्रवात सोमवार रात से मंगलवार सुबह के बीच तट से टकरा सकता है। आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में सबसे अधिक प्रभाव की आशंका है, जबकि ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी बारिश की संभावना है। जानें इस चक्रवात का अन्य राज्यों पर क्या असर पड़ेगा और मौसम की स्थिति कैसी रहेगी।
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मुरासु चक्रवात की दिशा


बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न मुरासु चक्रवात अब आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है। इस मौसम परिवर्तन ने दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी दी है। समुद्र की सतह का तापमान लगभग 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने के कारण तूफानी गतिविधियों को बल मिला है। यह पिछले सात दिनों में दूसरा बड़ा चक्रवाती सिस्टम है, जिसने मौसम विभाग की चिंताओं को बढ़ा दिया है।


चक्रवात का टकराव का समय

अनुमान है कि यह चक्रवात सोमवार रात ढाई बजे से मंगलवार सुबह चार बजे के बीच आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है। इस दौरान हवा की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँचने की संभावना है। इसका प्रभाव केवल तटीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तूफान के कमजोर होने के बाद भी कई स्थानों पर बारिश और बादल छाए रहने की संभावना है।


आंध्र प्रदेश पर प्रभाव

मुरासु के आगमन से आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में मौसम की स्थिति बेहद खराब रहने की आशंका है। राज्य के समुद्र किनारे के क्षेत्रों और रायलसीमा में भारी से अत्यधिक वर्षा हो सकती है। तेज हवाओं के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है। तमिलनाडु के उत्तरी हिस्सों में भी तूफानी गतिविधियों का असर देखने को मिल सकता है। यहाँ बारिश के साथ हवा की गति में वृद्धि होने की संभावना है। तेलंगाना के कई क्षेत्रों में भी तेज हवाओं के साथ वर्षा की संभावना जताई गई है, जहाँ हवा की गति 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच सकती है।


ओडिशा और छत्तीसगढ़ में बारिश

मुरासु का प्रभाव पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में भी देखने को मिल सकता है। तीन नवंबर से ओडिशा और छत्तीसगढ़ में लगातार दो दिनों तक भारी बारिश की संभावना है। मौसम में बदलाव के कारण इन राज्यों के कई क्षेत्रों में बादलों का जमावड़ा रह सकता है। कर्नाटक और केरल के कुछ हिस्सों में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। इस प्रकार, दक्षिण और पूर्वी भारत के कई राज्यों में अगले कुछ दिन मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।


मध्य भारत में चक्रवात का प्रभाव

मुरासु का असर आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मध्य भारत के कुछ हिस्सों में भी दिखाई दे सकता है। मध्य प्रदेश के दक्षिणी जिलों में वर्षा की गतिविधियों में वृद्धि होने की संभावना है। उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भी बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। हालांकि, उत्तरी भारत में इस तूफान के सीधे प्रभाव की संभावना कम है। इसके बावजूद मौसम में अप्रत्यक्ष बदलाव महसूस किया जा सकता है।


दिल्ली और अन्य राज्यों का मौसम

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में फिलहाल बारिश की संभावना कम है। इन राज्यों में मौसम सामान्यतः सूखा बना रह सकता है। दिन के समय धूप तेज रहने की संभावना है, जबकि सुबह और रात के समय तापमान में धीरे-धीरे कमी आ सकती है। इससे सर्द मौसम की शुरुआत का एहसास बढ़ेगा। मुरासु की तुलना में अर्णब तूफान के दौरान हवाओं की गति अधिक बताई गई थी, लेकिन मौजूदा सिस्टम का प्रभाव भौगोलिक रूप से बड़े क्षेत्र तक फैल सकता है।


पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी

जम्मू-कश्मीर में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने के कारण कुछ स्थानों पर वर्षा और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ गिरने की संभावना है। इसके विपरीत, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के अधिकांश क्षेत्रों में भी बारिश की गतिविधियाँ सीमित रहेंगी। दिन और रात के तापमान में अंतर बढ़ने से सुबह-शाम ठंड महसूस हो सकती है। आने वाले दिनों में मुरासु का कमजोर होना मौसम में बदलाव को तुरंत समाप्त नहीं करेगा, इसलिए दक्षिण और मध्य भारत के मौसम पर लगातार नजर रखी जाएगी।