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मेरठ में पत्नी और प्रेमी को पति की हत्या के लिए फांसी की सजा

उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में अदालत ने पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। इस मामले में अदालत ने इसे 'दुर्लभ से दुर्लभतम' अपराध मानते हुए दोनों को मृत्युदंड दिया। सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान ने केवल अपनी बच्चियों का ख्याल रखने की बात कही, जबकि साहिल चुप रहा। इस खौफनाक वारदात में सौरभ के शव को 5 टुकड़ों में काटकर एक ड्रम में छिपाने की योजना बनाई गई थी। पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने पर राहत जताई है।
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सौरभ राजपूत हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। मुख्य आरोपी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा दी गई है। अदालत ने इसे 'दुर्लभ से दुर्लभतम' अपराध मानते हुए दोनों को मृत्युदंड दिया। जब फैसला सुनाया गया, तो दोनों दोषी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े थे और फूट-फूटकर रोने लगे। पीड़ित परिवार ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि आज सौरभ को सच्चा न्याय मिला है।


मुस्कान का अंतिम बयान

‘मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए’
सजा सुनाए जाने से पहले अदालत ने दोनों दोषियों से उनका अंतिम पक्ष जानने की कोशिश की। जब जज ने मुस्कान से पूछा कि वह अपने पति की हत्या में दोषी पाई गई हैं, तो उन्होंने रोते हुए कहा, 'मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।' इसके बाद वह चुप हो गईं। वहीं, साहिल ने सिर झुकाकर चुपचाप खड़ा रहना पसंद किया।


खौफनाक हत्या की कहानी

शव को 5 टुकड़ों में काटने की साजिश
यह भयानक घटना 3 मार्च 2025 को हुई थी। मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर अपने पति सौरभ की हत्या की। आरोपियों ने शव को 5 टुकड़ों में काटकर एक बड़े नीले ड्रम में छिपाने की योजना बनाई थी। इस मामले के खुलासे के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया था, और पुलिस ने डिजिटल व फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर दोनों को गिरफ्तार किया।


सजा के बाद का परिवार का रिएक्शन

सौरभ की मां का आंसू भरा बयान
सजा सुनाए जाने के बाद सौरभ की मां अदालत परिसर में अपने आंसुओं को नहीं रोक पाईं। उन्होंने न्यायपालिका का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके बेटे की बेरहमी से हत्या करने वालों को सही सजा मिली है। परिवार को आज सुकून और शांति मिली है। अभियोजन पक्ष ने अदालत के इस फैसले को समाज में ऐसे जघन्य अपराधों के खिलाफ एक कड़ा संदेश बताया है।