मोहन भागवत का विजयादशमी भाषण: सरकार बदलने की कोशिशें असफल रहेंगी
मोहन भागवत का संदेश
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को विजयादशमी के अवसर पर अपने वार्षिक संबोधन में चुनाव आयोग के खिलाफ हाल के प्रदर्शनों और सरकार के परिवर्तन की संभावनाओं पर विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन से कुछ भी नहीं बदलता है। भागवत ने फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल में हुई हिंसा का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी कि भारत में भी ऐसे प्रयास हो रहे हैं, लेकिन यहां सरकार बदलने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।
भारत की दृढ़ता
भागवत ने कहा कि पश्चिमी देशों में एक तूफान चल रहा है, और भारत में भी ऐसे प्रयास हो रहे हैं, लेकिन यहां की सरकार नहीं बदलेगी। उन्होंने भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और समाज की सामूहिक ताकत को उजागर किया। उन्होंने यह भी कहा कि समस्याएं और आंदोलन आते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समाधान खोजना होना चाहिए, न कि दुश्मनी फैलाना।
आंदोलन का उद्देश्य
भागवत ने यह स्पष्ट किया कि आंदोलन केवल वोट या लोकप्रियता के लिए नहीं होने चाहिए। असली समाधान समाज में संवाद और बातचीत से निकलते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ शक्तियां पीड़ित होने का भाव पैदा करके असंतोष और अराजकता फैलाने का प्रयास कर रही हैं, जिससे सावधान रहना आवश्यक है।
क्या रिजीम चेंज से कुछ बदलता है?
पिछले दो दशकों में कई देशों में सत्ता परिवर्तन के बावजूद जमीनी हालात में कोई खास बदलाव नहीं आया है। सीरिया, लीबिया, मिस्र, इराक, सूडान, वेनेजुएला, यमन, ट्यूनीशिया, अफगानिस्तान और हैती जैसे देशों में राजनीतिक अस्थिरता और मानवीय संकट जस के तस बने हुए हैं।
सीरिया में स्थिति
सीरिया में बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। आर्थिक संकट गहरा बना हुआ है और 1.65 करोड़ से अधिक लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है।
लीबिया का गृहयुद्ध
लीबिया में कर्नल गद्दाफी के पतन के बाद से देश आंतरिक विभाजन का सामना कर रहा है। त्रिपोली में सरकार और पूर्वी क्षेत्र में खलीफा हफ्तर समर्थित प्रशासन के बीच संघर्ष जारी है।
मिस्र की आर्थिक चुनौतियां
मिस्र गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहा है, जबकि मानवाधिकार संस्थाएं राजनीतिक विरोधियों को दबाने का आरोप लगा रही हैं।
इराक की राजनीतिक स्थिरता
इराक में नए प्रधानमंत्री के तहत कुछ सुधार दिख रहे हैं, लेकिन राजनीतिक स्थिरता अभी भी एक चुनौती है।
सूडान का गृहयुद्ध
सूडान में सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच गृहयुद्ध जारी है, जिसमें हजारों लोग मारे जा चुके हैं।
वेनेजुएला की स्थिति
वेनेजुएला में अमेरिका के हस्तक्षेप के कारण राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है।
यमन का गृहयुद्ध
यमन में कई गुटों के बीच संघर्ष जारी है, जिससे मानवीय संकट गहरा हो गया है।
ट्यूनीशिया का राजनीतिक संकट
ट्यूनीशिया में राष्ट्रपति कैस सईद के सत्ता के केंद्रीकरण के कारण लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो गई हैं।
अफगानिस्तान की स्थिति
तालिबान के नियंत्रण के बाद से अफगानिस्तान गंभीर आर्थिक और मानवीय संकट का सामना कर रहा है।
हैती की राजनीतिक स्थिति
हैती में राष्ट्रपति जोवेनेल मोइज की हत्या के बाद से कोई निर्वाचित सरकार नहीं है, और देश में सशस्त्र गिरोहों का नियंत्रण बढ़ गया है।
