मोहसिन रजा को उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया
राजनीतिक हलचल के बीच आयोग का गठन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ फिर से तेज हो गई हैं। राज्य अल्पसंख्यक आयोग, जो पिछले दो वर्षों से खाली था, अब उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद तेजी से गठन की प्रक्रिया में है। पूर्व मंत्री मोहसिन रजा को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सरकार ने आयोग के अध्यक्ष और आठ सदस्यों के नामों के लिए नए प्रस्ताव भेजे हैं।
आयोग का गठन केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसके राजनीतिक महत्व भी हैं। विशेष रूप से 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले, भारतीय जनता पार्टी सरकार अल्पसंख्यक समुदायों के बीच अपनी पहुंच और प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। मोहसिन रजा पहले भी योगी सरकार में मंत्री रह चुके हैं और अल्पसंख्यक मामलों में पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे हैं।
आयोग का कार्यकाल और हाईकोर्ट की सख्ती
लखनऊ। योगी सरकार में मंत्री रहे पूर्व रणजी क्रिकेटर मोहसिन रजा को उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्हें कैबिनेट रैंक का दर्जा भी मिलेगा। इसके आलावा 8 सदस्य नियुक्त किए गए। pic.twitter.com/Xe0lCX6UEs
— Pardaphash Today (@PardaphashToday) September 8, 2026
2024 में आयोग का कार्यकाल समाप्त हुआ था
प्रदेश सरकार ने जून 2021 में अशफाक सैफी को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था। उनका कार्यकाल 29 जून 2024 को समाप्त हुआ। इसके बाद से आयोग में कोई नई नियुक्ति नहीं हुई, जिससे यह पद लंबे समय तक खाली रहा। इस मुद्दे को लेकर मामला उच्च न्यायालय में पहुंचा, जहाँ अदालत ने सरकार से जवाब मांगा और आयोग के गठन के लिए सख्त रुख अपनाया।
आयोग के गठन की प्रक्रिया में तेजी
HC की सख्ती के बाद सरकार की सक्रियता
हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई सितंबर के तीसरे सप्ताह में होने वाली है। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अदालत के रुख के बारे में जानकारी दी, जिसके बाद आयोग के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। पहले भी अध्यक्ष और सदस्यों के नामों का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन वह उच्च स्तर से वापस आ गया था। अब नए प्रस्ताव भेजे जाने की बात सामने आई है। मोहसिन रजा को अध्यक्ष बनाए जाने पर सहमति बनती नजर आ रही है।
अल्पसंख्यक समुदायों का प्रतिनिधित्व
सरकार का उद्देश्य आयोग में विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों को प्रतिनिधित्व देना है। इसमें जैन, बौद्ध, सिख और पारसी समाज के सदस्यों को शामिल करने की संभावना है। इससे आयोग के गठन को व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं। ऐसे में आयोग में नियुक्तियाँ भारतीय जनता पार्टी सरकार के लिए सामाजिक समीकरण साधने का एक माध्यम बन सकती हैं।
राजनीतिक संदेश देने की तैयारी
2027 से पहले राजनीतिक संदेश
मोहसिन रजा को आयोग की अध्यक्षता सौंपे जाने की चर्चा को भारतीय जनता पार्टी की अल्पसंख्यक नीति से जोड़ा जा रहा है। रजा लंबे समय से पार्टी के साथ अल्पसंख्यक राजनीति का चेहरा रहे हैं। उन्हें अध्यक्ष बनाए जाने से सरकार एक ओर हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करेगी, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक स्तर पर भी एक संदेश देने की कोशिश होगी। अब सभी की नजरें सरकार के अंतिम निर्णय पर हैं। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो आयोग को नया अध्यक्ष और सदस्य मिलेंगे, जिससे यह अल्पसंख्यकों के हितों और कल्याण से जुड़े मामलों में सक्रिय हो सकेगा।
