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मोहाली में सीबीआई की छापेमारी: झोटा हत्याकांड से जुड़े सबूतों की तलाश

पंजाब के मोहाली में सीबीआई ने मेडिकल भवन में छापेमारी की, जो परविंदर सिंह झोटा की हत्या से जुड़ी है। जांच में ड्रग लाइसेंस और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। यह कार्रवाई झोटा हत्याकांड की सीबीआई जांच से संबंधित है, जिसने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। जानें इस मामले में क्या हो रहा है और सीबीआई की जांच का दायरा क्या है।
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पंजाब में सीबीआई की कार्रवाई से मची हलचल


पंजाब की ताजा खबरें: मोहाली के सेक्टर-69 में स्थित पंजाब मेडिकल काउंसिल के मेडिकल भवन में सीबीआई ने छापेमारी की है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की टीम मंगलवार रात को यहां पहुंची और बुधवार को भी फार्मेसी विभाग में जांच जारी है। यह कार्रवाई परविंदर सिंह उर्फ झोटा की हत्या के मामले से संबंधित मानी जा रही है। जांच में ड्रग लाइसेंस और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यह मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि झोटा हत्याकांड की जांच अब सीबीआई के पास है और अदालत में भी ड्रग लाइसेंस से जुड़े मुद्दे उठ चुके हैं। इस कार्रवाई ने जांच के दायरे को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।


फार्मेसी विभाग में जांच का दायरा

मोहाली के मेडिकल भवन के फार्मेसी विभाग में सीबीआई की टीम द्वारा जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, ड्रग लाइसेंस और उनसे संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ भी की जा रही है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि टीम ने कौन-से रिकॉर्ड की जांच की है या किसी दस्तावेज को अपने कब्जे में लिया है।


झोटा हत्याकांड से जुड़े तार

परविंदर सिंह झोटा, जो मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता थे, की 13 अक्टूबर 2026 को एक मेडिकल स्टोर पर विवाद के दौरान हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार और अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू की गई थी। झोटा के परिवार ने स्वतंत्र जांच की मांग की थी, जिसके बाद पंजाब सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने 21 अक्टूबर को नई एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू की। एजेंसी हत्या की परिस्थितियों के साथ-साथ प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री के पहलुओं की भी जांच कर रही है।


ड्रग लाइसेंस पर हाईकोर्ट में उठे सवाल

झोटा हत्याकांड की जांच के साथ आरोपियों को ड्रग और हथियार लाइसेंस जारी करने का मुद्दा भी चर्चा में रहा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में इस मामले की सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि हत्या की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गई है। याचिका में यह सवाल भी उठाया गया था कि आरोपी अश्वनी कुमार की आपराधिक पृष्ठभूमि के बावजूद उसके मेडिकल स्टोर के ड्रग लाइसेंस को जारी रखने या नवीनीकरण की जांच होनी चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि सीबीआई याचिका में उठाए गए सभी पहलुओं की जांच कर सकती है।


पंजाब मेडिकल काउंसिल की भूमिका

पंजाब मेडिकल काउंसिल राज्य में डॉक्टरों के पंजीकरण और उनसे जुड़े नियामकीय कार्यों के लिए जिम्मेदार है। वहीं, फार्मासिस्टों के पंजीकरण और दवाओं की बिक्री से जुड़े लाइसेंस की जिम्मेदारियां अलग-अलग नियामकीय संस्थाओं के अंतर्गत आती हैं। इसलिए, मेडिकल भवन में जांच का उद्देश्य समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि सीबीआई किस विभाग के रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है।