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युवा मतदाताओं के लिए नए फॉर्म में बदलाव पर चुनाव आयुक्तों की चिंता

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चुनाव आयुक्तों एसएस संधु और विवेक जोशी ने युवा मतदाताओं के लिए फॉर्म छह में किए गए बदलाव को लेकर गंभीर शिकायतें की हैं। उन्होंने इसे मनमाना और अवैध बताते हुए कहा कि इस बदलाव से युवा मतदाताओं को परेशानी हो रही है। इसके अलावा, फॉर्म में नए प्रश्नों को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। जानें इस मुद्दे की पूरी जानकारी और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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चुनाव आयुक्तों की शिकायत


मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली को लेकर चुनाव आयुक्त एसएस संधु और विवेक जोशी ने गंभीर शिकायतें की हैं। इनमें से एक प्रमुख मुद्दा युवा मतदाताओं के लिए फॉर्म छह में किए गए बदलाव को लेकर है। दोनों आयुक्तों ने इस फॉर्म के प्रारूप में बदलाव को मनमाना और अवैध बताया है। उनका कहना है कि यह परिवर्तन युवा मतदाताओं के लिए कठिनाई और परेशानी का कारण बन रहा है।


उनका आरोप है कि इस बदलाव की जानकारी उन्हें पहले से नहीं दी गई थी। चुनाव आयुक्तों ने इसे गैरकानूनी करार देते हुए कहा कि चुनाव आयोग को इस तरह के निर्णय लेने के लिए केंद्र सरकार की अनुमति आवश्यक है।


फॉर्म छह में नए स्टेटमेंट

एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार, मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए फॉर्म छह में तीन प्रश्न रखे गए हैं। पहला, क्या आपका नाम पहले की मतदाता सूची में था? दूसरा, क्या आपके पिता या दादा का नाम पिछली सूची में था? और तीसरा, क्या आपके परिवार के किसी सदस्य का नाम मतदाता सूची में था?


हालांकि, चुनाव आयुक्तों का कहना है कि इन प्रश्नों का उत्तर देना अनिवार्य नहीं है, लेकिन बिना उत्तर दिए फॉर्म भरने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है। उनका मानना है कि मतदाता रजिस्ट्रेशन के 1960 के कानून में बदलाव किए बिना इस प्रकार के प्रश्न नहीं जोड़े जा सकते हैं।