युवाओं की आवाज़: जस्टिस मोर्चा की ‘जेन जी कनेक्ट यात्रा’ प्रयागराज पहुँची
प्रयागराज में जस्टिस मोर्चा की यात्रा
प्रयागराज। देशभर में पेपर लीक, बढ़ती बेरोजगारी और महंगी शिक्षा के खिलाफ छात्रों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। जस्टिस मोर्चा द्वारा 20 अगस्त को गोरखपुर के चौरी-चौरा से शुरू की गई ‘जेन जी कनेक्ट यात्रा’ अब प्रयागराज पहुँच चुकी है।
यह यात्रा कुशीनगर, देवरिया, बलिया, आज़मगढ़, वाराणसी जैसे कई जिलों से होते हुए 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) को लखनऊ में एक बड़ी जनसभा के साथ समाप्त होगी। जस्टिस मोर्चा का मानना है कि हालिया छात्र आंदोलनों के दबाव में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा युवाओं की एकजुटता की जीत है, लेकिन असली सुधार की लड़ाई अभी बाकी है। मोर्चा के अनुसार, जब एक सामान्य परिवार का बच्चा सरकारी नौकरी का सपना देखता है, तो पूरा परिवार कर्ज और संघर्ष के बोझ तले दब जाता है।
यूपी पुलिस सिपाही भर्ती (60 हजार पदों के लिए 48 लाख आवेदन) और यूपीपीएससी आरओ/एआरओ (411 पदों के लिए 10.76 लाख आवेदन) जैसी परीक्षाओं के पेपर लीक और रद्द होने से लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।
यात्रा का उद्देश्य रोजगार के गंभीर मुद्दों को उजागर करना है। गोविंद मिश्रा ने बताया कि ‘जेन जी कनेक्ट यात्रा’ उत्तर प्रदेश में शिक्षा और रोजगार के मुद्दों को लेकर निकाली गई है। उनका कहना है कि सरकार युवाओं की रोजगार संबंधी मांगों की लगातार अनदेखी कर रही है।
2018 से शिक्षक भर्ती लंबित है, दरोगा भर्ती में स्कोर कार्ड मांगने और लेखपाल पेपर लीक का विरोध करने पर युवाओं को सरकार की तरफ से केवल लाठियां मिली हैं। इसी नाराजगी के चलते युवा अपनी 10 सूत्रीय मांगों के साथ गोरखपुर से लखनऊ तक साइकिल यात्रा कर रहे हैं।
छात्रों का आरोप है कि 8 साल के लंबे इंतजार के बाद मात्र 11,000 शिक्षक पदों पर भर्ती निकालना सरकार का चुनावी ‘लॉलीपॉप’ है। बीएड (B.Ed) और डीएलएड (D.El.Ed) प्रशिक्षित लाखों बेरोजगार युवाओं की संख्या को देखते हुए यह भर्ती ‘ऊंट के मुंह में जीरे’ के समान है। युवाओं की मांग है कि राज्य में खाली पड़े लाखों पदों को जल्द से जल्द भरा जाए।
छात्रा अवंतिका ने कहा कि प्रदेश सरकार केवल विज्ञापनों में बड़े-बड़े वादे करती है, जबकि असलियत में सरकारी स्कूलों में लड़कियों के शौचालयों की स्थिति बेहद जर्जर है। इसके अलावा, लगातार हो रहे पेपर लीक और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सरकार पूरी तरह से चुप है। इन्हीं मुद्दों के विरोध में युवा साइकिल से लखनऊ तक यात्रा कर रहे हैं।
युवाओं का आक्रोश
प्रशांत कमल ने बताया कि राज्य में उद्योग और एमएसएमई (MSME) खत्म हो चुके हैं, जिससे युवाओं के पास केवल सरकारी नौकरी का ही विकल्प बचा है। लेकिन हजारों पद खाली होने के बावजूद सरकार द्वारा भर्तियां समय पर नहीं निकाली जा रही हैं। इसी आक्रोश में युवा यात्रा निकाल रहे हैं ताकि आम जनता को शिक्षित बेरोजगार युवाओं की दुर्दशा दिखा सकें। उनकी तीन प्रमुख मांगें हैं: स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा सुधरे, रोजगार के सभी खाली पद तुरंत भरे जाएं, और यह पूरी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी व समयबद्ध तरीके से संपन्न हो।
जस्टिस मोर्चा का स्पष्ट कहना है कि शिक्षा और रोजगार सीधे तौर पर राजनीतिक मुद्दे हैं। यह यात्रा एक ऐसे उत्तर प्रदेश की मांग कर रही है जहां हर जिले में उत्कृष्ट शिक्षण संस्थान और रोजगार के अवसर हों, ताकि युवाओं को अपना घर छोड़कर पलायन न करना पड़े। इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के 1000 से अधिक शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और कोचिंग सेंटरों पर नुक्कड़ सभाएं व जनसंवाद आयोजित किए जा रहे हैं।
जस्टिस मोर्चा की प्रमुख मांगें
हर साल भर्ती कैलेंडर जारी हो, सभी खाली सरकारी पद तत्काल भरे जाएं और रुकी हुई नियुक्तियां तुरंत शुरू हों। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भंग किया जाए। परीक्षाओं में पारदर्शिता हो, नॉर्मलाइजेशन खत्म हो और स्कोर कार्ड जारी हो। नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 वापस ली जाए और निजी स्कूलों की फीस की अधिकतम सीमा सरकार द्वारा तय की जाए। ठेका-संविदा प्रथा बंद हो और ‘समान काम-समान वेतन’ लागू किया जाए। शोधार्थियों के लिए समान फेलोशिप तय हो। पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों और शिक्षकों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं। जस्टिस मोर्चा ने व्यवस्था की जवाबदेही तय करने के लिए प्रदेश के सभी युवाओं से 2 अक्टूबर को ‘लखनऊ चलो’ का आह्वान किया है।
