यूएई के निवेश पर ट्रंप परिवार की कंपनी में विवाद, डेमोक्रेट सांसदों ने उठाए गंभीर सवाल
ट्रंप परिवार और यूएई का विवादास्पद संबंध
वाशिंगटन: अमेरिकी संसद के डेमोक्रेट सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप लगाया है कि उन्होंने विदेशी वित्तीय हितों को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में हस्तक्षेप करने की अनुमति दी। उनका कहना है कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ट्रंप परिवार के क्रिप्टोकरेंसी व्यवसाय में बड़े पैमाने पर निवेश किया, जिसके बाद प्रशासन ने कई अनुकूल निर्णय लिए।
एलिजाबेथ वॉरेन की अध्यक्षता वाली बैंकिंग, हाउसिंग और शहरी मामलों की समिति ने एक रिपोर्ट में कहा है कि यूएई से जुड़े अधिकारियों और संस्थाओं ने अमेरिकी प्रशासन से नीतिगत लाभ प्राप्त करने से पहले 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' (डब्ल्यूएलएफ) में करोड़ों डॉलर का निवेश किया। यह कंपनी ट्रंप और उनके बेटों द्वारा स्थापित की गई थी।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रशासन ने कम से कम 10 ऐसे निर्णय लिए हैं, जिनसे यूएई को लाभ हुआ। इनमें एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिप्स, विदेशी निवेश की स्वीकृति, हथियारों की बिक्री और क्रिप्टोकरेंसी विनियमन से संबंधित उपाय शामिल हैं। इस प्रकार के घटनाक्रमों ने हितों के टकराव और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं उत्पन्न की हैं।
एलिजाबेथ वॉरेन ने कहा, “अमेरिकी परिवार अपनी नौकरियों, बढ़ती कीमतों और बिलों के भुगतान को लेकर चिंतित हैं। वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप ऐसे निर्णयों से लाभ कमा रहे हैं, जो चीन जैसे देशों के लिए हमारी संवेदनशील तकनीक तक पहुंच को आसान बनाते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को साहस दिखाना होगा और हमें अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को सबसे ऊंची बोली लगाने वाले के हाथों नहीं बेचना चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, यूएई से जुड़े अधिकारियों और संस्थाओं ने ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह से चार दिन पहले डब्ल्यूएलएफ में लगभग 50 करोड़ डॉलर का निवेश किया और कंपनी का लगभग आधा हिस्सा हासिल कर लिया। यह निवेश यूएई के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शेख तहनून बिन जायद अल नाहयान के समर्थन से किया गया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समझौते से ट्रंप परिवार की संस्थाओं को कम से कम 18.7 करोड़ डॉलर और ट्रंप के मध्य-पूर्व दूत और डब्ल्यूएलएफ के सह-संस्थापक स्टीव विटकॉफ के परिवार को कम से कम 3.1 करोड़ डॉलर का लाभ हुआ।
डेमोक्रेट सांसदों ने यूएई एनएसए द्वारा नियंत्रित निवेश फर्म 'एमजीएक्स' से जुड़े लेन-देन पर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट के अनुसार, एमजीएक्स ने डब्ल्यूएलएफ द्वारा लॉन्च किए गए स्टेबलकॉइन 'यूएसडी1' का उपयोग करके क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज 'बाइनेंस' में 2 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की। इस लेन-देन से ट्रंप से जुड़े उद्यम के मूल्य में तेजी से वृद्धि हुई।
रिपोर्ट में शेख तहनून की अबू धाबी स्थित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी 'जी-42' का भी जिक्र है। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने पहले जी-42 के चीनी कंपनियों, विशेष रूप से हुआवेई और बीजिंग जीनोमिक्स इंस्टीट्यूट के साथ संबंधों को लेकर चिंता जताई थी। इसके बावजूद, प्रशासन ने कई ऐसे निर्णय लिए, जिनसे यूएई की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं को लाभ मिला।
इन निर्णयों में अमेरिकी एआई चिप बनाने वाली कंपनी सेरेब्रस में जी-42 के निवेश को मंजूरी देना, एडवांस्ड एआई चिप के निर्यात पर बाइडेन के समय की पाबंदियों को हटाना, यूएई के लिए 1.4 अरब डॉलर के हथियारों के पैकेज को मंजूरी देना और ऐसे समझौते करना शामिल हैं, जिनसे देश को बड़ी मात्रा में एडवांस्ड अमेरिकी सेमीकंडक्टर मिल सकें।
रिपोर्ट में बाइनेंस के खिलाफ सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन के मुकदमे को खत्म करने, बाइनेंस के फाउंडर चांगपेंग झाओ को राष्ट्रपति की ओर से माफी मिलने और जी-42 को 35,000 एडवांस्ड एनवीडिया ब्लैकवेल चिप्स खरीदने की मंजूरी मिलने का भी जिक्र है।
