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यूजीसी दिशानिर्देशों पर पुनर्विचार की तैयारी, सरकार ने बनाई नई समिति

केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी दिशानिर्देशों पर पुनर्विचार करने के लिए एक नई समिति बनाने का निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में सरकार ने यह सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया कि किसी भी छात्र के साथ भेदभाव न हो। यूजीसी के दिशानिर्देशों को लेकर सामान्य वर्ग में नाराजगी बढ़ी है, जिसके चलते भाजपा को चुनावों में नुकसान उठाना पड़ा है। जानें इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का क्या कहना है और आगे की प्रक्रिया क्या होगी।
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नई समिति का गठन


नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए जारी दिशानिर्देशों पर पुनर्विचार करने के लिए एक नई समिति का गठन किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में 5 नवंबर को हुई सुनवाई में सरकार ने बताया कि यूजीसी द्वारा जनवरी में जारी दिशानिर्देशों की समीक्षा की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी छात्र के साथ भेदभाव न हो।


यूजीसी दिशानिर्देशों का विवाद

यूजीसी द्वारा जारी दिशानिर्देश सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए भेदभावपूर्ण माने गए थे, जिसके चलते व्यापक विरोध हुआ। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने इन दिशानिर्देशों पर रोक लगा दी। सुनवाई के दौरान, सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय को बताया कि सरकार इस मुद्दे की गंभीरता से जांच कर रही है ताकि छात्रों की चिंताओं का समाधान किया जा सके।


सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

चीफ जस्टिस ने सभी छात्रों के हितों की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद, अदालत ने इस मामले की सुनवाई को चार सप्ताह के लिए टाल दिया। यह मामला 'अबेदा सलीम तडवी बनाम भारत संघ' और इससे जुड़े अन्य मामलों से संबंधित है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि जातिगत भेदभाव का सामना करने के बाद दो छात्रों ने आत्महत्या कर ली थी।


भाजपा की स्थिति

यूजीसी के दिशानिर्देशों के बाद सामान्य वर्ग में भाजपा के प्रति नाराजगी बढ़ी है। सोशल मीडिया पर राइटविंग समर्थक भी भाजपा के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। हाल ही में बिहार और उत्तर प्रदेश में हुए एमएलसी चुनावों में भाजपा के खराब प्रदर्शन को सामान्य वर्ग की नाराजगी से जोड़ा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में तीन महीने बाद चुनाव होने वाले हैं, जिससे यह माना जा रहा है कि यूजीसी के दिशानिर्देशों में बदलाव की पहल एक मजबूरी बन गई है।