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यूजीसी नेट परीक्षा में गड़बड़ी: एनटीए की विफलता पर सवाल उठे

हाल ही में यूजीसी नेट परीक्षा में एनटीए द्वारा तीन पेपर रद्द किए गए हैं, जिसमें कई गड़बड़ियां पाई गई हैं। छात्रों ने शिकायत की है कि पेपर में पुराने सवाल शामिल हैं और कई तथ्यात्मक गलतियां हैं। इसके चलते परीक्षा की नई तारीखें घोषित की गई हैं, जिससे परिणामों में देरी होगी। इस स्थिति ने छात्रों के बीच चिंता बढ़ा दी है और एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। क्या सरकार इस बार सुधार के लिए कदम उठाएगी? जानें पूरी कहानी में।
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यूजीसी नेट परीक्षा में पेपर रद्द


दिल्ली के जंतर मंतर पर मेडिकल में दाखिले के लिए नीट यूजी परीक्षा के पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के बाद, अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की एक और परीक्षा में गड़बड़ी सामने आई है। हाल ही में आयोजित यूजीसी नेट परीक्षा के तीन पेपर को रद्द करना पड़ा है, क्योंकि इनमें कई गलतियां पाई गई हैं। ये पेपर अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों के थे, जिन्हें छात्रों को फिर से देना होगा।


केंद्र सरकार ने एक राष्ट्रीय एजेंसी का गठन किया है, जिसका मुख्य कार्य परीक्षा का आयोजन करना है, लेकिन हर परीक्षा में किसी न किसी प्रकार की गड़बड़ी देखने को मिल रही है। कहीं परीक्षा केंद्रों में अनियमितता है तो कहीं पेपर लीक हो रहे हैं। यदि बाहरी ताकतें इसमें शामिल नहीं हैं, तो एनटीए के विशेषज्ञ प्रश्न पत्र तैयार करने में असफल हो रहे हैं।


यूजीसी नेट परीक्षा में प्रश्न पत्र तैयार करने में विफलता के कारण तीन पेपर में तथ्यात्मक और टाइपिंग की गलतियां पाई गई हैं। छात्रों का कहना है कि अंग्रेजी के पेपर में 150 में से 67 सवाल ऐसे हैं, जो 2024 में भी पूछे गए थे। इसके अलावा, सवालों के विकल्प में नाम और स्थानों की गलतियां भी हैं।


छात्रों ने जब इन गलतियों की शिकायत की, तो परीक्षा को रद्द कर दिया गया और सितंबर में नई तारीखों की घोषणा की गई। इससे परिणामों में देरी होगी और आगे की प्रक्रियाओं में भी बाधा आएगी। दो साल पहले नीट यूजी के पेपर लीक के बाद राधाकृष्णन आयोग का गठन हुआ था, जिसने एनटीए में सुधार के सुझाव दिए थे। इस वर्ष भी नीट यूजी पेपर लीक के बाद सुधार की आवश्यकता बताई गई है, लेकिन सरकार की ओर से सुधार की कोई जल्दी नहीं दिखाई दे रही है।