यूपीआई पेमेंट पर शुल्क लगाने का केंद्र सरकार का नया फैसला
यूपीआई पेमेंट पर नया शुल्क
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने यूपीआई के माध्यम से भुगतान पर शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। अब, किसी भी वस्तु या सेवा के लिए दो हजार रुपए से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू होगा। हालांकि, इस शुल्क की अधिकतम सीमा तीन सौ रुपए निर्धारित की गई है। इसका मतलब है कि चाहे भुगतान कितना भी हो, अधिकतम शुल्क तीन सौ रुपए ही होगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह 0.4 प्रतिशत शुल्क ग्राहकों से नहीं, बल्कि व्यापारियों से लिया जाएगा। दो हजार रुपए तक के लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। इसके साथ ही, रूपे डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान को भी इस नियम में शामिल किया गया है।
अगस्त में संसद के मानसून सत्र में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026 पारित होने के बाद यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने की चर्चा शुरू हुई थी। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि एक व्यक्ति बिना किसी शुल्क के दूसरे व्यक्ति को पैसे भेज सकता है।
इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि कोई एक लाख रुपए भेजता है, तो उस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, लेकिन दो हजार रुपए से अधिक का भुगतान करने पर शुल्क देना होगा। सरकार ने तीन सौ रुपए की अधिकतम सीमा तय की है, जिसके अनुसार 75 हजार या उससे अधिक के हर लेन-देन पर तीन सौ रुपए का शुल्क लगेगा।
सरकार की अधिसूचना के अनुसार, रेलवे, संचार सेवाओं, बीमा और ईंधन जैसी कुछ श्रेणियों में दो हजार रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतान पर पांच रुपए का निश्चित शुल्क लागू होगा। केंद्र सरकार ने यूपीआई को बढ़ावा देने की योजना 2021 में शुरू की थी और तब इसे मुफ्त रखने का आश्वासन दिया गया था। इसके तहत छोटे दुकानदारों को दो हजार रुपए तक के यूपीआई भुगतान पर 0.15 प्रतिशत का प्रोत्साहन दिया जाता था। 2024-25 तक इस पर 8,276 करोड़ का प्रोत्साहन दिया गया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक देश में लगभग 55.5 करोड़ यूपीआई उपयोगकर्ता थे। वित्त वर्ष 2025-26 में दुकानदारों को 198 लाख करोड़ रुपए का भुगतान यूपीआई के माध्यम से हुआ। इनमें से दो हजार रुपए से अधिक के लेन-देन केवल चार प्रतिशत थे, लेकिन इनका कुल मूल्य 131 लाख करोड़ रुपए था, जो यूपीआई के कुल भुगतान का 66 प्रतिशत है।
