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यूरोप में गर्मी से सड़कें पिघलने लगीं, भारत की सड़कें 50 डिग्री में भी सुरक्षित

इस लेख में यूरोप में भयंकर गर्मी के कारण सड़कें पिघलने की स्थिति और भारत की सड़कें कैसे 50 डिग्री सेल्सियस में भी सुरक्षित रहती हैं, पर चर्चा की गई है। जानें कि कैसे विभिन्न देशों में सड़क निर्माण की तकनीक और सामग्री इस भिन्नता का कारण बनती हैं। क्या आप जानते हैं कि ब्रिटेन में नरम बिटुमेन का उपयोग क्यों किया जाता है? इस लेख में इन सभी सवालों के जवाब दिए गए हैं।
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यूरोप में भयंकर गर्मी का प्रकोप

नई दिल्ली: इस समय पूरे यूरोप में अत्यधिक गर्मी का सामना किया जा रहा है। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने हीटवेव के चलते चेतावनी जारी की है। लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं। हालांकि, भारत की तुलना में वहां का तापमान इतना अधिक नहीं है, क्योंकि वहां पारा केवल 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा है, लेकिन फिर भी स्थिति गंभीर हो गई है। यूरोपीय देशों में आमतौर पर गर्मियों में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक ही रहता है, जबकि सर्दियों में तापमान माइनस में चला जाता है और बर्फबारी होती है।


सड़कें पिघलने की अजीब स्थिति

40 डिग्री में सड़कें पिघलने लगीं

इस अप्रत्याशित गर्मी के कारण ब्रिटेन और फ्रांस में एक अजीब स्थिति उत्पन्न हो गई है। महज 40 डिग्री सेल्सियस के तापमान में ही वहां की सड़कें पिघलने लगी हैं, जिससे कई स्थानों पर ट्रैफिक रोकना पड़ा है। यह सवाल उठता है कि भारत में 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने पर भी सड़कें नहीं पिघलती, तो ब्रिटेन में ऐसा क्यों हो रहा है। इसके पीछे ठंडे क्षेत्रों की सड़क निर्माण तकनीक और उपयोग किए गए विशेष सामग्री का बड़ा हाथ है।


डामर और बिटुमेन की गुणवत्ता

सड़क निर्माण में सामग्री का महत्व

ब्रिटेन और भारत दोनों में सड़क निर्माण के लिए डामर (एस्फाल्ट) का उपयोग किया जाता है, जो बिटुमेन और कंक्रीट का मिश्रण होता है। बिटुमेन एक गोंद की तरह काम करता है, जो कंक्रीट को मजबूती से बांधता है। लेकिन दोनों देशों के बीच सड़क की गुणवत्ता और गर्मी सहने की क्षमता में बड़ा अंतर बिटुमेन की प्रकृति के कारण है।


ब्रिटेन में नरम बिटुमेन का उपयोग

ब्रिटेन की जलवायु के अनुसार निर्माण

यूनाइटेड किंगडम में हॉट रोल्ड एस्फाल्ट (HRA) और डेंस एस्फाल्ट कंक्रीट का उपयोग किया जाता है। यह मिश्रण महीन कंक्रीट और नरम बिटुमेन की अधिकता से बना होता है। ब्रिटेन की ठंडी जलवायु के कारण नरम बिटुमेन का उपयोग किया जाता है, ताकि सर्दियों में सड़कें टूटने से बच सकें। लेकिन जब तापमान 40 डिग्री के आसपास पहुंचता है, तो यह अत्यधिक नरम होकर पिघलने लगता है।


भारत की सड़कें गर्मी सहन करती हैं

भारत में कठोर बिटुमेन का उपयोग

भारत में सड़क निर्माण के लिए हार्ड बिटुमेन और बिटुमिनस कंक्रीट का उपयोग किया जाता है। इसमें बड़े कंक्रीट का इस्तेमाल होता है। भारत में विस्कोसिटी-ग्रेडेड (VG) बिटुमेन बाइंडर का उपयोग किया जाता है, जो बहुत कठोर होते हैं। इनसे बनी सड़कें भारी वाहनों का भार और 50 डिग्री सेल्सियस जैसी गर्मी को सहन करने में सक्षम होती हैं। इसलिए भारत की सड़कें गर्मी में भी सुरक्षित रहती हैं।