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राजनाथ सिंह ने नागपुर में रक्षा क्षेत्र के लिए नई परियोजना का शुभारंभ किया

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नागपुर में यंत्र इंडिया लिमिटेड के आयुध निर्माण परिसर में एक नई रक्षा परियोजना का शुभारंभ किया। इस परियोजना का उद्देश्य देश की रक्षा और एयरोस्पेस उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाना है। राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भरता के महत्व पर जोर दिया और बताया कि भारत अब अपने नागरिकों के हाथों से आधुनिक उपकरणों का निर्माण कर रहा है। उन्होंने डिफेंस सेक्टर में भारत की प्रगति के आंकड़े साझा किए और 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता में स्वदेशी हथियारों की भूमिका को रेखांकित किया।
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राजनाथ सिंह ने नागपुर में रक्षा क्षेत्र के लिए नई परियोजना का शुभारंभ किया

नागपुर में नई रक्षा परियोजना का उद्घाटन

नागपुर: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के नागपुर में यंत्र इंडिया लिमिटेड के आयुध निर्माण परिसर में एक महत्वपूर्ण परियोजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने 10,000 टन क्षमता वाले एल्युमिनियम एक्सट्रूजन प्रेस परियोजना का भूमि पूजन किया। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित थे। यह महाप्रोजेक्ट देश की रक्षा और एयरोस्पेस उत्पादन क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नए प्लांट के चालू होने से रक्षा क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले एल्युमिनियम कॉम्पोनेंट्स का निर्माण स्वदेश में ही संभव होगा, जिससे भारत की महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी निर्भरता में कमी आएगी।


रक्षा व्यवस्था और नागपुर के विकास पर प्रभाव

इस अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि इस परियोजना का शुभारंभ आने वाले वर्षों में सकारात्मक प्रभाव डालेगा। इसका लाभ न केवल देश की रक्षा व्यवस्था को मिलेगा, बल्कि नागपुर शहर के विकास में भी योगदान देगा। उन्होंने इसे पूरे देश के लिए गर्व का विषय बताया और कहा कि यह परियोजना भारत की बदलती सोच का प्रतीक है। पहले देश को अपनी सैन्य जरूरतों के लिए अन्य देशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब हम अपने नागरिकों के हाथों से आधुनिक उपकरणों का निर्माण कर रहे हैं।


आत्मनिर्भरता: वैश्विक युद्ध के हालात में सबसे बड़ा हथियार

राजनाथ सिंह ने वैश्विक संघर्षों और तनावपूर्ण परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि युद्ध की स्थिति में सबसे पहले वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है। ऐसे समय में हर देश चाहता है कि उसकी सुरक्षा से जुड़ी सभी आवश्यकताएँ उसके अपने हाथों में हों। आत्मनिर्भरता का सही अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि जब हमारे पास अपनी तकनीक, ज्ञान और लोगों पर भरोसा होता है, तब हम अपने हितों की रक्षा करने में सक्षम होते हैं।


डिफेंस सेक्टर में भारत की प्रगति

राजनाथ सिंह ने देश के डिफेंस सेक्टर की प्रगति के आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि 2014 में घरेलू रक्षा उत्पादन 46,000 करोड़ रुपये था, जो अब 1,78,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। रक्षा निर्यात में भी भारत ने उल्लेखनीय वृद्धि की है। 2014 में भारत का रक्षा निर्यात 1,000 करोड़ रुपये से कम था, जबकि अब यह रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले 2 से 3 वर्षों में भारत ने 3 लाख करोड़ रुपये के डिफेंस उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है।


ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में स्वदेशी हथियारों का योगदान

अपने संबोधन के अंत में राजनाथ सिंह ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेनाओं की सफलता और साहस को देखा गया है, जो अब इतिहास में दर्ज हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सैन्य ऑपरेशन की सफलता में हमारे आधुनिक उपकरणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उच्च गुणवत्ता वाले हथियारों की बदौलत आतंकियों के ठिकानों को नष्ट किया गया। उन्होंने जोर दिया कि एक मजबूत सेना के साथ-साथ उनके साजो-सामान का बेहतरीन होना देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।