राजपाल यादव की चेक बाउंस मामले में नई मुश्किलें: सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत की शर्त
राजपाल यादव की कानूनी लड़ाई जारी
नई दिल्ली: चेक बाउंस के मामले में अभिनेता राजपाल यादव को अभी राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सरेंडर से छूट नहीं दी है। अदालत ने कहा है कि जेल से बचने के लिए उन्हें एक बड़ी राशि कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करनी होगी। अभिनेता को 5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त पर राहत देने पर विचार किया जा रहा है।
5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त
राजपाल यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें चेक बाउंस से संबंधित सात मामलों में उनकी दोषसिद्धि और तीन महीने की सजा को बरकरार रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सशर्त नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने सरेंडर से राहत के लिए रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त रखी है। इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। पहले, दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव के सरेंडर की अंतिम तारीख 10 सितंबर निर्धारित की थी।
फिल्म के लिए जारी चेक हुए थे बाउंस
यह मामला फिल्म निर्माता और फाइनेंसर मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित है। कंपनी ने राजपाल यादव, उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव और उनकी प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ सात शिकायतें दर्ज की थीं।
सूत्रों के अनुसार, उनकी फिल्म 'अता पता लापता' के निर्माण से जुड़े भुगतान के लिए जारी किए गए सात चेक बाउंस हो गए थे, जिसके बाद कंपनी ने कानूनी कार्रवाई की।
हाईकोर्ट ने सुनाई थी तीन महीने की सजा
दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए उन्हें तीन महीने की जेल की सजा सुनाई थी। अदालत ने शिकायतकर्ता को भुगतान करने के निर्देश भी दिए थे। हालांकि, पहले जमा की गई लगभग 2 करोड़ रुपये की राशि को कुल भुगतान में समायोजित करने की बात कही गई थी।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि राजपाल यादव कई बार अदालत के सामने भुगतान का भरोसा देने के बावजूद अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं कर सके। अब सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई से यह तय होगा कि उन्हें आगे क्या राहत मिलती है।
