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राजस्थान के अस्पताल में छत गिरने से महिला घायल, प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल

राजस्थान के चूरू जिले के सुजानगढ़ स्थित राजकीय मातृ एवं शिशु अस्पताल में एक महिला पर छत का प्लास्टर गिरने से गंभीर चोट आई। यह घटना सीसीटीवी में कैद हुई और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है। प्रशासन ने एक दिन पहले ही भवन की खराब स्थिति की सूचना दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। महिला को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। यह घटना सरकारी अस्पतालों की जर्जर स्थिति पर गंभीर सवाल उठाती है।
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राजकीय मातृ एवं शिशु अस्पताल में हादसा


वायरल वीडियो: राजस्थान के चूरू जिले के सुजानगढ़ में स्थित राजकीय मातृ एवं शिशु अस्पताल में बुधवार दोपहर एक बड़ा हादसा टल गया। अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर बने बरामदे की जर्जर छत का भारी प्लास्टर अचानक गिर गया। इस दौरान एक महिला इसकी चपेट में आ गई और गंभीर रूप से घायल हो गई। यह घटना अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। यह हादसा दोपहर लगभग 1:18 बजे हुआ, जिसके बाद अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद लोगों और सुरक्षा गार्ड ने तुरंत घायल महिला को अस्पताल के अंदर ले जाकर प्राथमिक उपचार कराया।


घायल महिला की पहचान 25 वर्षीय किरण मेघवाल के रूप में हुई है, जो सुजानगढ़ के गुलेरिया गांव की निवासी हैं। वह किसी निजी काम से अस्पताल आई थीं। जैसे ही वह मुख्य गेट से बाहर निकल रही थीं, उसी समय छत का प्लास्टर और सीमेंट का मलबा उनके सिर पर गिर गया। चोट लगने से उनके सिर पर गहरा घाव हुआ, जिसके लिए डॉक्टरों को दो टांके लगाने पड़े। इलाज के बाद महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। जानकारी के अनुसार, वह अस्पताल के पास स्थित एक मेडिकल स्टोर में काम करती हैं। हादसे के तुरंत बाद एहतियात के तौर पर अस्पताल का मुख्य प्रवेश द्वार बंद कर दिया गया, ताकि कोई अन्य व्यक्ति खतरे वाले क्षेत्र में न जा सके।


चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल प्रशासन ने हादसे से एक दिन पहले ही भवन की खराब स्थिति के बारे में लोक निर्माण विभाग को लिखित सूचना दी थी। पत्र में लगातार बारिश के कारण छतों में आई सीलन और बरामदे समेत कई हिस्सों के जर्जर होने का उल्लेख करते हुए जल्द मरम्मत की मांग की गई थी। इसके बावजूद समय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और अगले ही दिन यह हादसा हो गया।




अस्पताल प्रशासन के अनुसार, केवल बरामदा ही नहीं बल्कि रूम नंबर-1, टीकाकरण कक्ष और कई अन्य कमरों की छतें भी खस्ताहाल हैं। रूम नंबर-1 की छत का एक हिस्सा पहले ही गिर चुका है। इस स्थिति में मरीजों, गर्भवती महिलाओं और अस्पताल कर्मचारियों की सुरक्षा पर लगातार खतरा बना हुआ है। यह घटना सरकारी अस्पतालों की जर्जर इमारतों और जिम्मेदार विभागों की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाती है। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय वहां अधिक भीड़ नहीं थी। यदि उस समय बड़ी संख्या में मरीज या गर्भवती महिलाएं मौजूद होतीं, तो यह हादसा कहीं अधिक गंभीर हो सकता था।