राजस्थान में पांचना बांध के पानी को लेकर किसानों के बीच बढ़ा विवाद
करौली में पानी के बंटवारे का विवाद
करौली: पूर्वी राजस्थान के प्रमुख मिट्टी के बांध, पांचना बांध, एक बार फिर विवाद का केंद्र बन गया है। पानी के वितरण को लेकर स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि 74 गांवों के किसान दो समूहों में विभाजित हो गए हैं। यह मामला अब केवल धरनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 28 जून को प्रस्तावित रेल रोको आंदोलन तक पहुंच गया है, जिससे प्रशासन और राज्य सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं।
डूब क्षेत्र के किसानों का आंदोलन
विवाद के एक पक्ष में डूब क्षेत्र के 39 गांवों के किसान शामिल हैं। ये किसान पांचना-गुडला संघर्ष समिति के तहत पिछले 16 मई से बांध पर डेरा डाले हुए हैं। उनका कहना है कि बांध के निर्माण के दौरान उनकी उपजाऊ भूमि डूब क्षेत्र में चली गई थी, इसलिए उन्हें बांध के पानी पर पहला अधिकार मिलना चाहिए।
नहरों के पानी की मांग
दूसरी ओर, करौली और गंगापुर सिटी के बीच स्थित खंडीप गांव के 35 गांवों के किसान पिछले कुछ दिनों से धरने पर बैठे हैं। उनका तर्क है कि उन्हें 1992 से 2005 तक नहरों के माध्यम से नियमित सिंचाई का पानी मिलता रहा है, और उनका यह अधिकार समाप्त नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
इस विवाद में राजस्थान हाईकोर्ट भी शामिल हो चुका है। मई 2026 में अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि पांचना बांध का पानी कमांड क्षेत्र की नहरों में छोड़ा जाए। यह ध्यान देने योग्य है कि पिछले दो दशकों में यह तीसरी बार है जब अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा है, फिर भी सरकार ने अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला है।
आंदोलन की चेतावनी
खंडीप में चल रहे आंदोलन का नेतृत्व कांग्रेस विधायक रामकेश मीणा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद सरकार और प्रशासन कार्रवाई करने से बच रहे हैं। विधायक ने चेतावनी दी है कि यदि 27 जून तक नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया, तो 28 जून को बड़े पैमाने पर रेल रोको आंदोलन किया जाएगा।
सरकार के लिए चुनौती
पांचना बांध के पानी को लेकर दोनों पक्ष अपनी-अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। एक ओर डूब क्षेत्र के किसान पानी पर पहला हक जता रहे हैं, जबकि दूसरी ओर कमांड क्षेत्र के किसान अपने पुराने अधिकारों की बात कर रहे हैं। इस जल विवाद ने अब सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती पैदा कर दी है। यदि जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष और भी गंभीर रूप ले सकता है।
