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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्रों को आत्मनिर्भरता और रिश्तों की जिम्मेदारी समझाई

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने महर्षि यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में छात्रों को आत्मनिर्भरता और रिश्तों की जिम्मेदारी समझाई। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने फैसलों के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए और रिश्तों में मानसिक परिपक्वता आवश्यक है। राज्यपाल ने गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। जानें उनके विचार और सुझाव।
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राज्यपाल का संबोधन

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्राओं के भविष्य को लेकर गंभीरता दिखाई है। महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के सातवें दीक्षांत समारोह में उन्होंने छात्रों को रिश्तों की जिम्मेदारी समझने और आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय भी उपस्थित थे।


राज्यपाल ने कहा कि गर्लफ्रेंड बनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन शादी भी करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि कम उम्र में किसी लड़की को मां बनाकर छोड़ना गलत है। युवाओं को पहले आत्मनिर्भर बनना चाहिए ताकि वे भविष्य में परिवार की जिम्मेदारी उठा सकें।


उन्होंने यह भी कहा कि केवल शौक के लिए रिश्ते बनाना और उन्हें अधूरा छोड़ना गलत है। किसी भी रिश्ते में प्रवेश करने से पहले मानसिक परिपक्वता और भविष्य की स्पष्टता आवश्यक है। राज्यपाल ने छात्रों को गलत कामों से दूर रहने और अच्छे विचारों को अपनाने की सलाह दी।


राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए केंद्रीय सरकार की कई योजनाएं हैं। युवाओं को अपने ज्ञान और मेहनत का सही उपयोग करना चाहिए। गरीब परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के अवसर भी प्रदान करने होंगे।


उन्होंने डेटा संग्रहण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग की अपील की। आधुनिक तकनीक का उपयोग करके नए अवसरों की खोज की जा सकती है। युवाओं को इन तकनीकों का इस्तेमाल देश को आत्मनिर्भर बनाने में करना चाहिए।


महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के इस दीक्षांत समारोह में कुल 2,279 विद्यार्थियों को डिग्री और डिप्लोमा प्रदान किए गए। इनमें 20 शोधार्थियों को पीएचडी, 324 विद्यार्थियों को पोस्ट ग्रेजुएशन और 1,612 विद्यार्थियों को ग्रेजुएशन की डिग्री दी गई। इसके अलावा 323 विद्यार्थियों को डिप्लोमा भी प्रदान किया गया।