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राज्यसभा में 10 नए सदस्यों ने ली शपथ, भाषाई विविधता का प्रदर्शन

गुरुवार को भारतीय संसद के उच्च सदन, राज्यसभा में 10 नए सदस्यों ने शपथ ग्रहण किया। इस समारोह में विभिन्न भाषाओं का प्रतिनिधित्व देखने को मिला, जिसमें सांसदों ने अपनी मातृभाषा में शपथ ली। आंध्र प्रदेश, झारखंड, तमिलनाडु, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश और ओडिशा से निर्वाचित सदस्यों ने सदन में शामिल होकर लोकतंत्र की बहुभाषी परंपरा को दर्शाया। इस समारोह में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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राज्यसभा में शपथ ग्रहण समारोह

नई दिल्ली: भारतीय संसद के उच्च सदन, राज्यसभा में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित 10 सदस्यों को शपथ दिलाई। समारोह में एक गरिमामय माहौल देखने को मिला।


इस समारोह में विभिन्न राज्यों के सांसदों ने अपनी मातृभाषा में शपथ ली। शपथ लेने वाले सदस्यों में प्रवीण चक्रवर्ती, देबाशीष सामंतराय, सना सतीश बाबू, विजय चिंतकायाला, भाष्यम राम कृष्ण, लिंगामनेनी रमेश, राजेश परमानंद शुक्ला, बैद्यनाथ राम, परिमल नथवानी और ताई टागाक शामिल हैं।


इन सदस्यों ने औपचारिक रूप से राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण की और अब वे सदन की कार्यवाही में भाग लेने के लिए पात्र हो गए हैं। इस समारोह की एक विशेषता देश की भाषाई विविधता भी रही। 10 में से पांच सदस्यों ने हिंदी में, एक ने अंग्रेजी में, एक ने तमिल में और तीन ने तेलुगु में शपथ ली।


यह भारतीय लोकतंत्र की बहुभाषी परंपरा और संविधान द्वारा सभी भाषाओं को दिए गए सम्मान को दर्शाता है। शपथ लेने वाले सदस्यों में आंध्र प्रदेश से चार, झारखंड से दो और तमिलनाडु, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश और ओडिशा से एक-एक सदस्य शामिल हैं। इससे विभिन्न राज्यों की आवाज को राज्यसभा में मजबूती मिलेगी।


इस शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी, सदन के कई सदस्य और राज्यसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।


राज्यसभा में शपथ ग्रहण की यह प्रक्रिया भारतीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण संवैधानिक परंपरा का हिस्सा है। इसके माध्यम से निर्वाचित जनप्रतिनिधि संविधान के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करते हैं और जनता की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी संभालते हैं। नए और पुनर्निर्वाचित सदस्यों के शामिल होने से विभिन्न मुद्दों को नई ऊर्जा और दृष्टिकोण के साथ उठाने की उम्मीद है।