राफेल लड़ाकू विमान में लेजर गाइडेड रॉकेट की नई तकनीक का समावेश
भारतीय वायुसेना की ताकत में राफेल का योगदान
भारतीय वायुसेना की मुख्य ताकत है फ्रांस से आयात किए गए राफेल विमान
भारतीय वायुसेना के लिए राफेल विमान एक महत्वपूर्ण शक्ति बन चुके हैं। भारत ने 2016 में फ्रांस के साथ 36 राफेल विमानों का सौदा किया था, और ये सभी विमान अब भारतीय वायुसेना के पास हैं। इसके अलावा, सरकार ने फ्रांस से 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का अनुरोध किया है।
ये नए विमान भारत में ही निर्मित किए जाएंगे।
फ्रांस की नई तकनीक
फ्रांस ने अपने राफेल लड़ाकू विमानों में 68 मिमी लेजर गाइडेड रॉकेट को जोड़ने में सफलता प्राप्त की है। यह हथियार ड्रोन के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए विकसित किया गया है। यह कदम तब उठाया गया है जब बिना पायलट वाले हवाई खतरों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे वायु सेनाएं सस्ते विकल्पों की तलाश कर रही हैं।
नई तकनीक का विकास
इस कार्यक्रम को एलएडीएसी के नाम से जाना जाता है, जिसका उद्देश्य फ्रांसीसी वायु और अंतरिक्ष सेना को ड्रोन के खिलाफ एक प्रभावी और किफायती क्षमता प्रदान करना है। फ्रांसीसी मीडिया के अनुसार, इस तकनीक के विकास में दासौ एविएशन और थेल्स का सहयोग शामिल था।
हालांकि, इस तकनीक की लागत के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है।
जल्द ही उपलब्ध
इस अनुबंध के तहत काम को आठ महीने से भी कम समय में पूरा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई के अंत से फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष बल को लॉन्चर पॉड्स, लेजर गाइडेड रॉकेट और एलएडीएसी मोड वाले टैलोइस लेजर डेजिग्नेशन पॉड्स का पहला बैच मिलना शुरू हो जाएगा।
