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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय को मिली क्लीन चिट

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय को क्लीन चिट मिल गई है, जिससे वह फिर से सक्रिय हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक चिट्ठी में नृपेंद्र मिश्रा पर आरोप लगाए गए हैं। इस पर नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि उन्होंने ऐसी कोई चिट्ठी नहीं देखी है। समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सवाल उठाए हैं। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं।
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चंपत राय की वापसी

राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में चंपत राय को पूरी तरह से क्लीन चिट मिल गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय अब फिर से सक्रिय हो गए हैं। हाल ही में एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल हुई है, जिसे चंपत राय द्वारा लिखा गया बताया जा रहा है। इस 9 पन्नों की चिट्ठी में मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा पर सवाल उठाए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि चंपत राय ने इस चिट्ठी की प्रामाणिकता पर कोई टिप्पणी नहीं की है। जब नृपेंद्र मिश्रा से इस चिट्ठी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसी कोई चिट्ठी नहीं देखी है और इसे मीडिया की मनगढ़ंत कहानी करार दिया।


समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया

इस चिट्ठी को लेकर कई समाचार पत्रों में रिपोर्ट्स प्रकाशित हुई हैं, लेकिन चंपत राय ने अपने सोशल मीडिया पर इस विषय में कोई बयान नहीं दिया है। इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। सपा का आरोप है कि योगी आदित्यनाथ, जो दूध का दूध और पानी का पानी करने का दावा करते हैं, क्या राम मंदिर चढ़ावे की चोरी में शामिल हैं?


नृपेंद्र मिश्रा का बयान

नृपेंद्र मिश्रा ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'कौन सा पत्र? मैंने ऐसा कोई पत्र नहीं देखा है। जब तक मैं पत्र नहीं देखता, मैं यही कहूंगा कि यह सब आपकी मनगढ़ंत कहानी है। शायद ऐसा कोई पत्र नहीं है और इस तरह की कोई आलोचना नहीं की गई है। 9 पन्नों का पत्र हो सकता है, लेकिन उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं की होगी। आप लोग हर जगह विवाद पैदा करना चाहते हैं, इसलिए इस तरह से मेरे सामने इसे प्रस्तुत कर रहे हैं।'


चिट्ठी की सामग्री

यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि यह चिट्ठी आधिकारिक रूप से जारी नहीं की गई है, इसलिए इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं की जा सकती। सोशल मीडिया पर वायरल इस चिट्ठी में चंपत राय पर आरोप लगाया गया है कि निर्माण से संबंधित सभी निर्णय नृपेंद्र मिश्रा द्वारा लिए गए थे। इसमें यह भी कहा गया है कि राम मंदिर के निर्माण के लिए L&T और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का चयन भी नृपेंद्र मिश्रा का निर्णय था। चिट्ठी में यह भी उल्लेख किया गया है कि राम मंदिर का निर्माण समय पर पूरा करने के लिए नृपेंद्र मिश्रा ने कई बाधाओं को दूर किया।


नृपेंद्र मिश्रा का पूर्व बयान

जब राम मंदिर चंदा चोरी का विवाद सामने आया था, तब नृपेंद्र मिश्रा ने भी कुछ सवाल उठाए थे और जांच का समर्थन किया था। उन्होंने चंदा चोरी की घटना को 'कलंक' बताया था।