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राम मंदिर ट्रस्ट ने पीएमओ को वित्तीय जानकारी देने से किया इनकार

राम मंदिर ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय को वित्तीय जानकारी देने से इनकार कर दिया है, यह कहते हुए कि एसआईटी जांच चल रही है। बीजेपी नेता रजनीश सिंह ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन और संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की थी। जानें इस मामले में क्या हुआ और ट्रस्ट ने किस तरह की जानकारी देने से मना किया।
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राम मंदिर में दान और चढ़ावे में हेराफेरी का मामला

नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे में हेराफेरी के मामले में नया खुलासा हुआ है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय से प्राप्त पत्र पर एसआईटी जांच का हवाला देते हुए वित्तीय जानकारी देने से मना कर दिया है।


जब प्रधानमंत्री कार्यालय ने अयोध्या के बीजेपी नेता रजनीश सिंह द्वारा भेजे गए पत्र के संदर्भ में जिला प्रशासन से जानकारी मांगी, तो ट्रस्ट ने आय-व्यय, दान, बैंक खातों, जमीन के लेन-देन और संपत्ति की जानकारी देने से इनकार कर दिया। रजनीश सिंह ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन और संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की थी।


बीजेपी नेता की शिकायत

राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर डॉ. रजनीश सिंह ने पीएमओ को दो बार पत्र लिखा। उन्होंने पहली बार 9 जून को पत्र भेजा, जिसमें ट्रस्ट से वित्तीय लेनदेन और संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक करने का अनुरोध किया। इसके बाद, 12 जून को उन्होंने एक और पत्र भेजा, जिसमें चढ़ावे की जानकारी की मांग की। 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया था।


पीएमओ ने ट्रस्ट से मांगी जानकारी

बीजेपी नेता के पत्र को ध्यान में रखते हुए पीएमओ ने जिला प्रशासन को संदर्भित किया। अयोध्या जिला प्रशासन ने इस मामले में श्रीराम मंदिर ट्रस्ट से संपर्क किया। सूत्रों के अनुसार, 23 जून को अयोध्या के एडीएम (प्रशासन) विशु राजा को लिखे गए पत्र में एडीएम (कानून-व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने पीएमओ द्वारा मांगी गई जानकारी के लिए चंपत राय से संपर्क किया था।


चंपत राय ने जानकारी देने से किया इनकार

अयोध्या के एडीएम (कानून-व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी के अनुसार, चंपत राय ने यह कहते हुए जानकारी देने से मना कर दिया कि एसआईटी जांच चल रही है और जांच पैनल सभी आवश्यक रिकॉर्ड और जानकारी इकट्ठा कर रहा है। पीएमओ को भेजी गई शिकायत में कई जानकारियों को सार्वजनिक करने की मांग की गई थी, जिसमें 'समर्पण निधि' अभियान के तहत इकट्ठा किए गए कोष, विभिन्न तरीकों से मिले दान, सोना, चांदी और गहनों के रूप में मिले योगदान, बैंक खाते और वित्तीय लेन-देन, जमीन की खरीद-बिक्री, मंदिर निर्माण और प्रशासन पर खर्च, और आडिट व निरीक्षण रिपोर्ट शामिल हैं।