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राम मंदिर दान घोटाले पर कांग्रेस का हिमाचल में प्रदर्शन

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने राम मंदिर दान घोटाले के खिलाफ प्रदर्शन किया है। पार्टी ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह इस मामले में दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर रैलियां आयोजित की हैं और दान घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह रुख राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों से भी जुड़ा है। जानें इस मुद्दे पर कांग्रेस की रणनीति और भविष्य की चुनौतियों के बारे में।
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कांग्रेस का आंदोलन

राम मंदिर में दान की चोरी के मामले पर कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा आंदोलन या प्रदर्शन नहीं किया है। हालांकि, पार्टी ने कुछ स्थानों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की हैं, लेकिन इसे एक प्रमुख मुद्दा बनाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर सक्रियता नहीं दिखाई है। हिमाचल प्रदेश में, कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर लगातार सड़कों पर उतर रही है। शिमला, बिलासपुर, धर्मशाला और अन्य जिलों में रैलियां आयोजित की गईं, और मंदिरों तक मार्च किया गया, जिसमें दान घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई।


प्रदर्शन की गतिविधियाँ

हिमाचल कांग्रेस ने मंगलवार को सभी जिला मुख्यालयों में इस मुद्दे पर प्रदर्शन किया। इसके बाद राम मंदिर जाकर भजन-कीर्तन किया गया और भाजपा को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की गई। इस दौरान बीजेपी के खिलाफ नारेबाजी भी की गई, जैसे 'चंदा चोर हो बर्बाद' और 'राम नाम पर खा गए चंदा'।


बीजेपी पर आरोप

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कुलदीप राठौर ने कहा कि केंद्र सरकार दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने राम मंदिर के नाम पर राजनीति करते हुए करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ किया है। उन्होंने इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से कराने की मांग की।


कांग्रेस का रुख

हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि संघ और बीजेपी ने 130 हिंदुओं की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाई है, जिसे कांग्रेस सहन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी तब तक इस मुद्दे को उठाती रहेगी जब तक वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती और दानपात्र का पैसा वापस नहीं किया जाता।


राजनीतिक पृष्ठभूमि

विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह रुख केवल राम मंदिर विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों से भी जुड़ा है। हिमाचल प्रदेश में हिंदू आबादी 95 प्रतिशत से अधिक है, इसलिए कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि वह राम मंदिर का विरोध नहीं कर रही, बल्कि दान में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग कर रही है।


भविष्य की चुनौतियाँ

2024 में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का न्योता कांग्रेस ने ठुकरा दिया था, लेकिन कुछ नेता राम मंदिर के पक्ष में बयान देते रहे हैं। 2027 में विधानसभा चुनावों को देखते हुए, कांग्रेस को अपनी सरकार फिर से बनाने की चुनौती का सामना करना होगा। राम मंदिर चंदा चोरी का मुद्दा बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस का एक महत्वपूर्ण हथियार बन सकता है।


सामाजिक परिस्थितियाँ

राम मंदिर दान घोटाले पर कांग्रेस का हिमाचल में प्रदर्शन