राम मंदिर दान चोरी पर मोहन भागवत की सख्त चेतावनी
अयोध्या में दान पेटी की चोरी का मामला
अयोध्या। अयोध्या के राम मंदिर में दान पेटी से चोरी की घटना ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। इस संदर्भ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस गंभीर अपराध के दोषियों को किसी भी स्थिति में नहीं बख्शा जाएगा।
रविवार को नागपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए भागवत ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कोई अलग बयान नहीं दिया, बल्कि संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के हालिया बयान को सामने रखा। भागवत ने कहा कि होसबाले ने इस मुद्दे पर कल एक विस्तृत बयान जारी किया है, जिसे सभी को देखना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने बच्चों में बढ़ते मोबाइल स्क्रीन टाइम और अकेलेपन के कारण आत्महत्याओं की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की और भारतीय संस्कारों की ओर लौटने की अपील की।
‘मोबाइल और अकेलापन बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा’
इस विवाद के बीच, भागवत नागपुर में 'सन्मार्ग माइंड वेलनेस' केंद्र के उद्घाटन के अवसर पर पहुंचे थे। वहां उन्होंने नई पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य और डिप्रेशन के बारे में एक गंभीर सच साझा किया। भागवत ने चेतावनी दी कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम और परिवारों में बुजुर्गों के मार्गदर्शन की कमी के कारण बच्चे मानसिक रूप से कमजोर हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 12वीं कक्षा में फेल होने पर बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं या घर में डांट पड़ने पर खौफनाक कदम उठा रहे हैं। भागवत ने इसके लिए माता-पिता की व्यस्तता और बच्चों को बचपन से मोबाइल देने की आदत को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि आज घरों में दादी-नानी की कहानियां गायब हो गई हैं, जो कभी बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाती थीं। नई पीढ़ी अकेलेपन का सामना कर रही है और उन्हें संवाद की आवश्यकता है। यदि वे भटक रहे हैं, तो यह बड़ों की नाकामी है।
भागवत ने जोर देकर कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की यह चुनौती इतनी गंभीर है कि इसे केवल डॉक्टरों के द्वारा नहीं सुलझाया जा सकता। इसके लिए समाज, स्कूल और परिवार को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने पश्चिमी मनोविज्ञान के बजाय 'योग वशिष्ठ' और 'पतंजलि योग सूत्र' जैसे प्राचीन भारतीय ज्ञान को मिलाकर एक आधुनिक और संपूर्ण 'भारतीय मनोविज्ञान' विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
