राम मंदिर दान में अनियमितताओं के मामले में 8 गिरफ्तार, 6 सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारी
राम मंदिर दान में अनियमितताओं का मामला
अयोध्या के राम मंदिर में दान की राशि में गड़बड़ियों के चलते 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से 6 वाराणसी की एक सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारी हैं। यह एजेंसी, जिसका नाम सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज है, मंदिर में नकदी की गिनती के लिए लोगों को भेजती थी। इसे दिसंबर 2017 में प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का दर्जा दिया गया था।
एजेंसी के मालिक गौरव सिंह ने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की अयोध्या की नया घाट शाखा ने उनसे 19 लोगों को नकदी गिनने के लिए रखने का अनुरोध किया था। बैंक ने इन लोगों के नाम भी सुझाए थे, और हर महीने इनका वेतन लगभग 20,000 रुपये था.
बैंक पर दबाव डालने का आरोप
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से छह इसी सुरक्षा एजेंसी के तहत काम कर रहे थे। पुलिस ने इनमें से सात के पास से 79.85 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। आरएसएस से जुड़े ट्रस्ट के कुछ सदस्यों पर आरोप है कि उन्होंने बैंक पर दबाव डालकर कुछ विशेष व्यक्तियों को गिनती टीम में शामिल करवाया। इस मामले में ट्रस्ट के दो प्रमुख पदाधिकारियों, अनिल मिश्रा और चंपत राय, ने इस्तीफा दे दिया है.
विवाद की शुरुआत
समाजवादी पार्टी के नेता तेज नारायण पांडे ने 7 जून को आरोप लगाया कि मंदिर के दान में 5 से 7.5 करोड़ रुपये गायब हो गए हैं। इसके बाद, 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच में अनियमितताएं सामने आईं, जिसके परिणामस्वरूप 26 जून को आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया.
SBI की प्रतिक्रिया
बैंक ने कहा है कि वह इस मामले की जांच में पूरी तरह से सहयोग कर रहा है। राम मंदिर ट्रस्ट को जनवरी 2024 की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से बैंकिंग सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। यह मामला अभी भी जांच के अधीन है और पुलिस तथा विशेष जांच टीम इसकी जांच कर रही है.
