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राम मंदिर दान में हेराफेरी: SBI कर्मचारियों की भूमिका की जांच

अयोध्या में राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान में हेराफेरी के मामले की जांच में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। SIT ने छह SBI कर्मचारियों से पूछताछ की योजना बनाई है। जांच में सामने आए तथ्यों ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं, और अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस मामले में करोड़ों के घोटाले की आशंका जताई जा रही है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और क्या हो रहा है आगे।
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अयोध्या में राम मंदिर दान में अनियमितताओं की जांच


अयोध्या: राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान में कथित हेराफेरी और चोरी का मामला गंभीर रूप लेता जा रहा है। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) अब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके चलते बैंक कर्मचारियों से पूछताछ की योजना बनाई जा रही है।


SBI के छह कर्मचारियों से पूछताछ की संभावना


जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अयोध्या पुलिस और एसआईटी को संदेह है कि दान की राशि की गिनती और उसके रखरखाव में कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध हो सकती है। इसी संदर्भ में एसबीआई के छह कर्मचारियों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है। हालांकि, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया है कि वह जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रहा है और मामले की निष्पक्ष जांच में हर संभव मदद करेगा।


तीन महीने पहले ही गड़बड़ी की आशंका जताई गई थी


जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, लगभग तीन महीने पहले एसबीआई प्रबंधन ने मंदिर ट्रस्ट से दान की राशि की गिनती में लगे कुछ कर्मचारियों को हटाने की सिफारिश की थी। बैंक को पहले से ही व्यवस्था में कुछ अनियमितताओं की आशंका थी, जिसके चलते संबंधित कर्मचारियों को हटाने की बात की गई थी। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और एसबीआई के बीच हुई बैठक में दान की राशि गिनने के लिए कुछ सख्त नियम बनाए गए थे। इनमें कर्मचारियों के बिना जेब वाले कपड़े पहनने और उनकी नियमित सुरक्षा जांच का प्रावधान था। लेकिन जांच में यह पाया गया कि इन नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।


दान पात्रों की चाबियां गलत हाथों में होने का आरोप


जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि नियमों के विपरीत कुछ दान पात्रों की चाबियां ऐसे व्यक्तियों के पास थीं, जिन्हें इसके लिए अधिकृत नहीं किया गया था। सूत्रों के अनुसार, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव के पास कई दान पात्रों की चाबियां होने की बात सामने आई है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। मामले का सबसे गंभीर पहलू सीसीटीवी फुटेज को लेकर सामने आया है। नियमों के अनुसार, जहां दान की राशि की गिनती होती थी, वहां की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखा जाना चाहिए था। लेकिन जांच में पता चला कि कई फुटेज केवल 45 दिनों के भीतर ही डिलीट या हटा दी गईं। इससे जांच एजेंसियों को महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने में मुश्किलें आ सकती हैं।


अब तक आठ गिरफ्तार, करोड़ों के घोटाले की आशंका


इस मामले में विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई। अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से लगभग 80 लाख रुपये नकद और विदेशी मुद्रा भी बरामद की गई है। साथ ही उनकी संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।


शुरुआत में यह मामला सीमित वित्तीय अनियमितता का प्रतीत हो रहा था, लेकिन अब जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह कथित घोटाला कहीं अधिक बड़े स्तर पर फैला हो सकता है। ऐसे में एसआईटी की आगे की जांच और पूछताछ इस मामले में कई और अहम खुलासे कर सकती है।