राशन वितरण प्रणाली में बदलाव: 1.5 करोड़ लोगों के राशन कार्ड होंगे बंद
राशन वितरण प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तन
भारत में हर महीने 80 करोड़ से अधिक नागरिकों को राशन प्रदान किया जाता है। सरकार पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के माध्यम से देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 764 जिलों में राशन पहुंचाती है। लेकिन अगले महीने से लगभग 1.5 करोड़ लोगों का राशन बंद होने जा रहा है। इसका कारण यह है कि इन लोगों ने पिछले 6 महीनों में राशन नहीं लिया है। इन लाभार्थियों को 3 महीने का समय दिया जाएगा, और यदि वे अपनी स्थिति साबित करते हैं, तो उनके राशन कार्ड को समाप्त नहीं किया जाएगा।
राशन प्रणाली का उद्देश्य और प्रक्रिया
एक रिपोर्ट के अनुसार, 1 अक्टूबर से 1.58 करोड़ लोगों के लिए राशन वितरण प्रणाली को बंद किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य PDS डेटाबेस को साफ करना और फर्जी लाभार्थियों को हटाना है। यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि इन नामों पर कोई और राशन कार्ड न ले सके।
यह प्रक्रिया अचानक नहीं होगी। पहले इन लाभार्थियों के राशन कार्ड को अस्थायी रूप से निष्क्रिय किया जाएगा। इसके बाद, उन्हें 3 महीने का समय दिया जाएगा। यदि वे साबित करते हैं कि वे असली लाभार्थी हैं और केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर लेते हैं, तो उनके राशन कार्ड फिर से सक्रिय कर दिए जाएंगे। यदि वे ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो उनके राशन कार्ड स्थायी रूप से समाप्त कर दिए जाएंगे।
फर्जी राशन कार्ड की समस्या
जुलाई 2026 में संसद में केंद्र सरकार ने बताया था कि कुल 20.57 करोड़ राशन कार्ड सक्रिय थे। 2024 में 48.85 लाख और 2025 में 41.41 लाख राशन कार्ड हटाए गए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन राशन कार्ड के माध्यम से 80.38 करोड़ लोगों को राशन मिलता है, जिनमें से 16.99 करोड़ महिलाएं अपने परिवारों की मुखिया हैं।
पश्चिम बंगाल में पिछले 6 महीनों में 11.12 लाख राशन कार्ड रद्द किए गए हैं। आरोप है कि मृतकों के राशन कार्ड भी समाप्त नहीं किए गए हैं और उनके नाम पर राशन लिया जा रहा है। आमतौर पर राशन कार्ड में बदलाव तब होते हैं जब लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं, परिवारों में बंटवारा होता है या मुखिया का निधन होता है। कई बार पुराने राशन कार्ड रद्द कर दिए जाते हैं और नए जारी किए जाते हैं।
