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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन: 2047 तक विकसित भारत का संकल्प

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की बात की। उन्होंने तिरंगे को स्वतंत्रता का प्रतीक बताया और नागरिकों से जागरूक रहने का आग्रह किया। उन्होंने आर्थिक विकास, सामाजिक समावेश और सिंधु जल संधि के निलंबन पर भी चर्चा की। यह संबोधन भारत की वैश्विक स्थिति और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण है।
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राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश


स्वतंत्रता दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि आज का भारत हर किसी के लिए सपने देखने और आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने यह भी बताया कि वैश्विक युद्धों के कारण संकट उत्पन्न हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित हो रही है।


उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ने की बात की और नागरिकों से जागरूक रहने का आग्रह किया। उन्होंने विभाजन विभीषिका दिवस के महत्व को भी रेखांकित किया, जिसमें लाखों लोगों को शरणार्थी बनना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान को नहीं छोड़ा।


तिरंगा: हमारी स्वतंत्रता का प्रतीक

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा संविधान जनभागीदारी पर आधारित है, और यह हमारे लोकतंत्र की उपलब्धि है। उन्होंने तिरंगे को स्वतंत्रता का प्रतीक बताते हुए कहा कि इसे गर्व के साथ फहराया जाना चाहिए।


उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता के 80वें वर्ष का शुभारंभ होने वाला है, और सभी भारतीय इसे उल्लास के साथ मनाते हैं।


स्वतंत्र भारत की नियति के निर्माता

द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत माता ने पराधीनता की बेड़ियों से मुक्ति पाई। सभी देशवासी स्वतंत्र भारत की नियति के निर्माता हैं। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत लोगों की सराहना की, जो राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं।


सिंधु जल संधि का निलंबन

राष्ट्रपति ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था से जुड़े सभी व्यक्तियों का यह कर्तव्य है कि वे सुनिश्चित करें कि संसाधनों की कमी के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे। उन्होंने आतंकवाद को पनाह देने वाले देशों के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित करने को राष्ट्रीय हित में बताया।


आर्थिक विकास और सामाजिक समावेश

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने समावेशी विकास की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने बताया कि 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है और प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 59 करोड़ खाताधारक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े हैं।


उन्होंने यह भी कहा कि 80 करोड़ लोगों के लिए निशुल्क राशन की व्यवस्था की गई है और आयुष्मान भारत योजना के तहत 60 करोड़ लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है।


भारत की वैश्विक स्थिति

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स किए हैं, जिससे हमारे देश का सम्मान विश्व पटल पर बढ़ा है।


उन्होंने यह भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक औसत से दोगुनी से अधिक विकास दर की ओर बढ़ रही है, और यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जाए।