राष्ट्रपति मुर्मु 23 जून को पद्म श्री पुरस्कार समारोह का आयोजन करेंगी
पद्म श्री पुरस्कार समारोह की जानकारी
नई दिल्ली: भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 23 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में पद्म श्री पुरस्कार समारोह का आयोजन करने जा रही हैं। इस अवसर पर दो व्यक्तियों को देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म श्री, प्रदान किया जाएगा। ये दोनों व्यक्ति समाज की सेवा में उल्लेखनीय योगदान दे चुके हैं। इनमें लद्दाख की डॉ. पदमा गुरमेद और कर्नाटक के डॉ. सुरेश हनगवाड़ी शामिल हैं। आइए, इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।
डॉ. पदमा गुरमेद का परिचय
डॉ. पदमा गुरमेद (पद्म श्री)
डॉ. पदमा गुरमेद लद्दाख की एक प्रमुख हस्ती हैं। वे राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान, लेह की संस्थापक निदेशक और लद्दाख अमची सभा की अध्यक्ष हैं। सोवा-रिग्पा एक प्राचीन बौद्ध चिकित्सा पद्धति है, जो जड़ी-बूटियों, आहार और जीवनशैली के माध्यम से उपचार करती है।
डॉ. गुरमेद ने इस पारंपरिक चिकित्सा को औपचारिक मान्यता दिलाने और इसे हिमालयी क्षेत्रों में फैलाने के लिए अथक प्रयास किए हैं। वे नीति निर्माण, अनुसंधान और परियोजनाओं के संचालन में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में, जहां आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं सीमित हैं, सोवा-रिग्पा स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य का आधार बन गई है। उनके प्रयासों से इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति को नई पहचान मिली है।
डॉ. सुरेश हनगवाड़ी का योगदान
डॉ. सुरेश हनगवाड़ी (पद्म श्री)
डॉ. सुरेश हनगवाड़ी कर्नाटक के दावणगेरे से हैं। वे कर्नाटक हीमोफीलिया सोसाइटी (KHS) के संस्थापक और अध्यक्ष हैं। स्वयं गंभीर हीमोफीलिया-B से पीड़ित होने के बावजूद, उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी बीमारी को दूसरों की सहायता में बदल दिया।
पिछले 40 वर्षों से, वे हीमोफीलिया और दुर्लभ रक्तस्राव वाली बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। उन्होंने हजारों मरीजों की पहचान, उनके उपचार, पुनर्वास और बेहतर जीवन जीने में मदद की है। वे एक कुशल चिकित्सक, दूरदर्शी नेता और सच्चे समाजसेवी के रूप में जाने जाते हैं।
ये दोनों व्यक्ति समाज के कमजोर वर्गों की सेवा में समर्पित रहे हैं। राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाने वाला पद्म श्री पुरस्कार उनके जीवनभर के संघर्ष और योगदान को सम्मानित करता है।
