राष्ट्रपति मुर्मू ने एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक को दी मंजूरी
दिल्ली में एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक की स्वीकृति
दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को स्वीकृति प्रदान की है। इस विधेयक में लोक परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक के मामलों में आरोपियों को शीघ्र सजा दिलाने के लिए प्रत्येक राज्य में फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने और सजा को बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।
कानून मंत्रालय ने शुक्रवार को एक गजट नोटिफिकेशन जारी कर बताया कि राष्ट्रपति ने इस संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। यह विधेयक इस सप्ताह की शुरुआत में संसद के दोनों सदनों में पारित हुआ था।
नए कानून के लागू होने के बाद, पेपर लीक मामलों की जांच को दो महीने के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा।
Bill to amend anti-paper leak law gets President's assent pic.twitter.com/uWtklpXAob
— Press Trust of India (@PTI_News) August 1, 2026
इस कानून के तहत, पेपर लीक या परीक्षाओं में अनुचित साधनों का उपयोग करने वालों को न्यूनतम 5 साल और अधिकतम 10 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। संगठित अपराध के लिए, नए कानून में कम से कम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक की मुख्य विशेषताएँ
यह विधेयक सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह अधिकार देता है कि वे किसी भी सत्र अदालत को प्रस्तावित कानून के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित कर सकें।
- बिल में यह प्रावधान है कि विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में कार्यवाही रोजाना जारी रहेगी और चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा किया जाएगा।
- केंद्र सरकार को किसी भी अपराध की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स बनाने का अधिकार भी दिया गया है।
- कानून के तहत अपराधों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान है।
- सभी राज्य सरकारों और यूटी प्रशासन को कानून के तहत मामलों को चलाने के लिए एक या अधिक विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का अधिकार है।
- किसी भी फैसले, सजा या आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट के दो जजों की पीठ में अपील करने का प्रावधान है, और अपील स्वीकार होने की तारीख से तीन महीने के भीतर उसका निपटारा किया जाएगा।
- नए कानून के तहत, परीक्षा में पेपर लीक या अनुचित तरीकों का उपयोग करने वालों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना होगा।
- संगठित अपराध के लिए, विधेयक में कम से कम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
