राष्ट्रीय संग्रहालय में स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण पर संगोष्ठी
स्वच्छता ही सेवा अभियान का आयोजन
नई दिल्ली: देशभर में 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान 2026 का आयोजन जोर-शोर से किया जा रहा है। इस वर्ष की थीम 'स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत' है, जो दर्शाती है कि जनभागीदारी के बिना एक स्वच्छ और उन्नत राष्ट्र की कल्पना अधूरी है। राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में भी इस अभियान के तहत स्वच्छता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। 27 अक्टूबर 2026 को वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्त भारत और पटाखों से दूरी जैसे विषयों पर संगोष्ठी और प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में संग्रहालय के स्थायी अधिकारियों, कर्मचारियों, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के सदस्यों और संविदा कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी, सरकारी योजनाओं की उपयोगिता और जनभागीदारी के महत्व पर अपने विचार साझा किए। प्रतियोगिता में चार-चार प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।
राष्ट्रीय संग्रहालय की भूमिका
राष्ट्रीय संग्रहालय, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख सांस्कृतिक संस्था है। यह भारतीय कला, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ शैक्षणिक और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस पहल ने पर्यावरण संरक्षण को दैनिक जीवन और सामाजिक व्यवहार से जोड़ने का संदेश दिया।
पटाखों से दूरी का महत्व
पटाखों से बनाएं दूरी, स्वच्छ हवा है जरूरी
कार्यक्रम के पहले चरण में संग्रहालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने 'पटाखों से बनाएं दूरी, स्वच्छ हवा है जरूरी' विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। डॉ. कनक लता सिंह, उप संग्रहाध्यक्ष (चित्रकला) ने स्वच्छता को मानव जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने दीपावली के मूल संदेश को उजागर करते हुए कहा कि त्योहारों को स्वच्छता और प्रकृति के सम्मान से जोड़ने की आवश्यकता है।
प्लास्टिक मुक्त भारत की दिशा में कदम
प्लास्टिक मुक्त भारत: पृथ्वी को दें नया जीवन
कार्यक्रम के दूसरे चरण में 'प्लास्टिक मुक्त भारत: प्लास्टिक को कहें ना, पृथ्वी को दें नया जीवन' विषय पर चर्चा हुई। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के श्री राहुल कुमार ने प्लास्टिक प्रदूषण के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नदियों के माध्यम से प्लास्टिक कचरा समुद्र तक पहुंचता है, जिससे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान होता है।
वृक्षारोपण का महत्व
वृक्षारोपण: कल की साँसें, आज का संकल्प
कार्यक्रम के तीसरे चरण में संग्रहालय के संविदा कर्मचारियों ने 'वृक्षारोपण: कल की साँसें, आज का संकल्प' विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने वृक्षों के संरक्षण के लिए जनआंदोलन चलाने और स्वस्थ श्वसन के लिए स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई।
अध्यक्षीय वक्तव्य
इस संगोष्ठी की अध्यक्षता सहायक निदेशक (राजभाषा) श्री राजेश कुमार ने की। उन्होंने कहा कि आज के विचार केवल भाषण नहीं हैं, बल्कि हमारे अस्तित्व और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की बुनियादी ज़रूरतें हैं।
निर्णायक की भूमिका
डॉ. प्रवीण गुप्ता ने निभाई निर्णायक की भूमिका
प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति के महासचिव डॉ. प्रवीण गुप्ता ने निभाई। उन्होंने सभी प्रतिभागियों के विचारों की सराहना की और कहा कि पर्यावरण संरक्षण के संबंध में प्रस्तुत विचार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया
सभी श्रेणियों में चार-चार प्रतिभागियों को किया गया पुरस्कृत
प्रतियोगिता के अंतर्गत सभी श्रेणियों में चार-चार प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। इस आयोजन ने कर्मचारियों को अपनी रचनात्मकता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया।
जागरूकता से व्यवहार परिवर्तन तक का संदेश
इस संगोष्ठी ने यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। पौधे लगाना, उनकी देखभाल करना, और त्योहारों को प्रकृति के अनुकूल तरीके से मनाना हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए।
