राहुल गांधी ने छात्र आंदोलन पर केंद्र सरकार को घेरा, उठाई तीन प्रमुख मांगें
राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को छात्र आंदोलन और पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए तीन मुख्य मांगें रखीं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और कहा कि वर्तमान हालात में उनके पास पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, शिक्षा प्रणाली में हो रही गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है।
तीन प्रमुख मांगें
राहुल गांधी ने अपनी पहली मांग में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा। दूसरी मांग के तहत उन्होंने छात्र प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात की। तीसरी मांग में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की अपील की। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ जो व्यवहार हुआ, उसने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं और सरकार को इस पर संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
152 पेपर लीक की घटनाएं, लेकिन कोई सजा नहीं
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 152 परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं हुई हैं, लेकिन अब तक किसी भी मामले में दोषियों को सजा नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ा है। लाखों छात्र वर्षों की मेहनत और मानसिक दबाव झेलकर परीक्षा देते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनके भविष्य पर सवाल खड़े कर देती हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए
राहुल गांधी ने कहा कि छात्र केवल निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं, जिसे किसी भी लोकतंत्र में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था को गंभीर संकट में डाल दिया है। उनका कहना था कि छात्रों का शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वास बहाल करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
