रूस और अमेरिका का भूगर्भीय मिलन: नया सुपर महाद्वीप बनने की संभावना
धरती की सतह की गतिशीलता
मास्को: धरती की सतह जो स्थिर प्रतीत होती है, वास्तव में भीतर से निरंतर गतिशील है। महाद्वीप हर साल कुछ सेंटीमीटर की गति से अपनी स्थिति बदलते हैं। रूसी वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक सिद्धांत प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, आने वाले करोड़ों वर्षों में पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों में होने वाले बड़े परिवर्तनों के कारण महाद्वीप एक बार फिर आपस में जुड़कर एक विशाल महाद्वीप (सुपर कॉन्टीनेंट) का निर्माण करेंगे। इस प्रक्रिया में रूस और अमेरिका एक साथ आ सकते हैं।
अटलांटिक महासागर का सिकुड़ना
अटलांटिक महासागर के सिकुड़ने से करीब आएंगे महाद्वीप, बनेगा नया सुपर कॉन्टीनेंट
रूसी एकेडमी ऑफ साइंसेज के स्टेट जियोलॉजिकल म्यूजियम के निदेशक सर्गेई चेरकासोव के अनुसार, धरती की सतह में परिवर्तन की गति पहले के अनुमानों से कहीं अधिक है। महाद्वीपों का जुड़ना और फिर बिखरना एक प्राकृतिक चक्र है, जो हर 40 से 60 करोड़ वर्षों में दोहराया जाता है। वर्तमान में धरती इसी चक्र के मध्य चरण में है।
महाद्वीपों का नया स्वरूप
वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में अटलांटिक महासागर धीरे-धीरे सिकुड़ने लगेगा, जिससे अमेरिका, यूरोप और एशिया एक-दूसरे के करीब आ जाएंगे। इस परिवर्तन के कारण अंटार्कटिका को छोड़कर अन्य सभी प्रमुख महाद्वीप उत्तरी गोलार्ध में एकत्रित होकर एक विशाल भूभाग का निर्माण करेंगे।
यूरेशिया का विभाजन
बैकल झील की दरार बांटेगी यूरेशिया को, रूस का पूर्वी हिस्सा अमेरिका से जुड़ेगा
इस भूवैज्ञानिक प्रक्रिया के दौरान यूरेशिया (यूरोप और एशिया) दो हिस्सों में विभाजित हो सकता है। यह विभाजन 'पैन-एशियन रिफ्ट' के माध्यम से होगा, जो बैकल झील के क्षेत्र से गुजरता है। बैकल झील एक सक्रिय रिफ्ट जोन में स्थित है, जहां धरती की आंतरिक परत खिंच रही है।
भविष्य की भूगोल
भविष्य में यह दरार यूरेशिया को दो भागों में बांट देगी, जिससे एक भाग पश्चिम की ओर और दूसरा पूर्व की दिशा में खिसकेगा। परिणामस्वरूप, रूस का पूर्वी भाग उत्तर अमेरिका की टेक्टोनिक प्लेट से जुड़ जाएगा। हालांकि, यह परिवर्तन इतना धीमा होगा कि मानव जीवनकाल में इसका कोई प्रत्यक्ष अनुभव नहीं होगा।
भौगोलिक बदलाव का समय
20 से 30 करोड़ साल बाद बदलेगा धरती का भूगोल, बदलेंगे मौसम और समुद्री धाराएं
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस भौगोलिक बदलाव को पूरा होने में लगभग 20 से 30 करोड़ वर्ष लगेंगे। उस समय तक पृथ्वी का मौजूदा नक्शा, पर्वत श्रृंखलाएं, महासागर और जलवायु पूरी तरह से बदल चुके होंगे। करोड़ों वर्ष पहले भी धरती पर 'पैंजिया' नाम का एक सुपर कॉन्टीनेंट था, जिसके टूटने से वर्तमान महाद्वीपों का निर्माण हुआ था।
भविष्य की चुनौतियाँ
वैज्ञानिकों का कहना है कि रूस और अमेरिका का यह भूवैज्ञानिक जुड़ाव किसी राजनीतिक या कूटनीतिक घटनाक्रम का परिणाम नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी की आंतरिक प्लेट टेक्टोनिक्स की निरंतर चलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया का नतीजा है। नया सुपर कॉन्टीनेंट बनने से वैश्विक स्तर पर समुद्री धाराओं, मौसम चक्र और जीव-जगत के विकास पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
