रूस के ड्रोन हमले: यूक्रेन की अर्थव्यवस्था पर बढ़ता खतरा
रूस के हमले जारी, यूक्रेन की अर्थव्यवस्था पर असर
कीव: यूक्रेन पर रूस के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। शनिवार को रूस ने लगभग 500 ड्रोन के माध्यम से यूक्रेन पर हमला किया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि जब रूस को सैन्य मोर्चे पर सफलता नहीं मिली, तो उसने यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि खाद्य भंडार, पेट्रोल पंप, दवा निर्माण और आम यात्री ट्रेनों को लक्ष्य बनाया जा रहा है।
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर रूस के हमलों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि रूस के ड्रोन हमले पूरे दिन जारी रहे हैं, और इस समय भी 'शाहेद' ड्रोन आसमान में सक्रिय हैं। सुबह से अब तक लगभग 500 ड्रोन लॉन्च किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि रूस ने इस युद्ध को केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रखा है। जहां उसे सैन्य मोर्चे पर सफलता नहीं मिल रही, वहां उसने अब यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। उनकी रणनीति सीधी है, उन सभी स्थानों को नष्ट करना जो लोगों को युद्ध की कठिनाइयों में टिके रहने में मदद कर सकते हैं।
जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूसी हमलों में खाद्य गोदाम, पेट्रोल पंप, दवा निर्माण और भंडारण सुविधाएं, आम यात्री ट्रेनें, रिहायशी इमारतें और नागरिक व्यवसायों को निशाना बनाया जा रहा है।
हाल के दिनों में, रूस ने एक इस्पात कारखाने पर भी हमला किया, जो एक भारतीय कारोबारी के स्वामित्व में है। इसके अलावा, सूरजमुखी तेल बनाने वाली एक अमेरिकी कंपनी और प्लंबिंग फिटिंग्स बनाने वाली एक पोलिश कंपनी को भी निशाना बनाया गया।
जेलेंस्की ने कहा कि रूसी हमलों का असर ट्रकों की पार्किंग, बंदरगाहों, शॉपिंग मॉल और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर भी पड़ा है।
उन्होंने कहा कि रूस यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना चाहता है और इसके माध्यम से हमारे प्रतिरोध को तोड़ना चाहता है। इसलिए यह आवश्यक है कि इन हमलों का जवाब उचित कार्रवाई से दिया जाए और हमारे सहयोगी देशों को भी इनकी स्पष्ट नैतिक और राजनीतिक निंदा करनी चाहिए।
जेलेंस्की ने कहा कि रूसी कंपनियां, जो युद्ध के लिए सरकारी बजट में टैक्स देती हैं, और वे रूसी अरबपति, जिनके बिना राष्ट्रपति पुतिन की व्यवस्था की कल्पना भी नहीं की जा सकती, उन्हें यह महसूस होना चाहिए कि जब तक यह युद्ध जारी है, दुनिया में ऐसी कोई जगह नहीं होनी चाहिए जहां वे पूरी शांति और आराम से रह सकें।
उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होने के पहले दिन से ही हमारे सहयोगी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का उद्देश्य यह रहा है कि रूसी नेतृत्व अपने करीबी कारोबारियों को यह भरोसा न दिला सके कि उन्हें युद्ध के नतीजों का कोई असर नहीं झेलना पड़ेगा।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि प्रतिबंध ऐसे ही जारी रहने चाहिए ताकि रूसी कारोबारी अपने नेतृत्व पर दबाव डालें और युद्ध खत्म करने की मांग करें। साथ ही रूस की अपने पड़ोसी देशों और यूरोप के प्रति नफरत की नीति को भी समाप्त करने की मांग करें।
जब यूक्रेन की अर्थव्यवस्था रूस के लिए केवल एक निशाना बन गई है, तब यह समय नहीं है कि यूरोप रूसी अरबपतियों को अपने मित्रों की तरह देखे।
और जब रूस इस युद्ध को लंबा खींचने के लिए हर यूरो और हर डॉलर का इस्तेमाल कर रहा है, तब रूसी कंपनियों और कारोबारियों को ऐसा माहौल देना जहां वे युद्ध के असर को महसूस किए बिना सामान्य जीवन जी सकें, न केवल नैतिक रूप से गलत है बल्कि खुद के लिए भी नुकसानदायक और खतरनाक है।
