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रेलवे स्टेशनों पर पेयजल गुणवत्ता और सुविधाओं की कमी पर CAG की रिपोर्ट

हाल ही में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा जारी रिपोर्ट में देशभर के रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की स्थिति की गंभीरता को उजागर किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 90 प्रतिशत स्टेशनों पर आवश्यक सुविधाओं की कमी है और कई स्थानों पर पेयजल में बैक्टीरिया की उपस्थिति पाई गई है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या जानकारी दी गई है और रेलवे बोर्ड के निर्देशों पर क्या सवाल उठाए गए हैं।
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रेलवे स्टेशनों पर सुविधाओं की स्थिति


देशभर के रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की स्थिति को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक नई रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। इस ऑडिट में रेलवे के विभिन्न जोन के 512 गैर-उपनगरीय स्टेशनों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में कई स्टेशनों पर आवश्यक सुविधाओं की कमी और पेयजल की गुणवत्ता में गंभीर खामियों का उल्लेख किया गया है।


पेयजल में बैक्टीरिया की उपस्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 में आठ जोन के 49 और 2023-24 में नौ जोन के 56 स्टेशनों से प्लेटफॉर्म पर लगे नलों के पानी के नमूने लिए गए। जांच में कुछ नमूनों में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए हैं। इसके अलावा, कई स्टेशनों के वाटर कूलर में ई-कोलाई की उपस्थिति भी सामने आई है, जो आमतौर पर मल संदूषण से संबंधित बैक्टीरिया माना जाता है।


बड़े स्टेशनों की भी जांच

ऑडिट के दौरान दक्षिणी रेलवे के कोयंबटूर-पलक्कड़, दक्षिण-मध्य रेलवे के हैदराबाद और मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला जैसे प्रमुख स्टेशनों का अध्ययन किया गया। पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन को भी इस जांच में शामिल किया गया था।


90 प्रतिशत स्टेशनों में सुविधाओं की कमी

CAG के अनुसार, जिन 512 स्टेशनों की जांच की गई, उनमें से 458 यानी लगभग 90 प्रतिशत स्टेशनों पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं की कमी पाई गई। मुंबई सेंट्रल, CSMT, हावड़ा-सियालदह और नई दिल्ली जैसे प्रमुख स्टेशनों पर भी बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता, कूड़ेदान और इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले जैसी सुविधाओं में कमी देखी गई।


रेलवे बोर्ड के निर्देशों पर सवाल

रिपोर्ट में कहा गया है कि रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में NSG-1 से NSG-6 श्रेणी के स्टेशनों पर न्यूनतम सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए थे। CAG ने जल आपूर्ति व्यवस्था की नियमित जांच और पेयजल की गुणवत्ता के व्यापक परीक्षण के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करने की सिफारिश की है।