लखनऊ अग्निकांड: 14 परिवारों का उजड़ना और सिस्टम की लापरवाही
लखनऊ में अग्निकांड की त्रासदी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी में हाल ही में हुए एक भयानक अग्निकांड ने सभी को हिलाकर रख दिया है। इस हादसे में 14 परिवारों के चिराग बुझ गए, जिनमें अधिकांश छात्र शामिल थे। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अक्सर बड़ी घटनाओं के बाद ही जिम्मेदार लोग फायर एनओसी और सुरक्षा मानकों की याद करते हैं। लखनऊ में इससे पहले भी ऐसी कई दुखद घटनाएं हो चुकी हैं। झांसी के एक अस्पताल में भी आग लगने से कई बच्चों की जान गई थी। लेकिन इसके बाद सिस्टम कुछ दिनों तक कार्रवाई का ढोल पीटता है और फिर सब कुछ भूल जाता है।
अब सोचिए उन परिवारों के बारे में, जिनके बच्चे कुछ समय पहले हंसते-खेलते घर से निकले थे और अब उनकी दर्दनाक मौत की खबर आई है। उनके लिए यह स्थिति कितनी भयानक होगी, इसे शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। लेकिन इस लापरवाह और भ्रष्ट सिस्टम को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। अब यही सिस्टम फायर एनओसी और अन्य जांचों का ढिंढोरा पीटेगा।
लेकिन सवाल यह है कि यह सब पहले क्यों नहीं हुआ? क्या यह सिस्टम ऐसी दुखद घटनाओं का इंतजार कर रहा था? ये अग्निकांड में मारे गए लोग नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का शिकार हुए लोग हैं। पहले हुई घटनाओं से भी सिस्टम ने कोई सबक नहीं लिया, जिसके कारण आज ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
जानकारी के अनुसार, अलीगंज में एक कोचिंग संस्थान में भीषण आग लग गई, जिससे हड़कंप मच गया। राहत और बचाव कार्य शुरू होने से पहले ही आग ने विकराल रूप ले लिया था। इस अग्निकांड में 14 लोगों की जान चली गई है। मौके पर डीजीपी राजीव कृष्ण और प्रमुख सचिव संजय प्रसाद भी पहुंचे हैं। लखनऊ के जिलाधिकारी और प्रशासनिक टीम के साथ पुलिस बल भी मौजूद है। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है।
