लखनऊ अग्निकांड: सीएम ने विशेष जांच दल का गठन किया
लखनऊ में आग लगने से हुई त्रासदी
छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज, चार आरोपी गिरफ्तार
हाल ही में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक तीन मंजिला इमारत की दूसरी मंजिल पर आग लगने से 15 लोगों की दुखद मृत्यु हो गई। इनमें से अधिकांश युवा थे, जिनकी उम्र 18 से 25 वर्ष के बीच थी। कुछ लोग आग से बचने के लिए इमारत से कूद गए, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रात में एक उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें दोषियों की पहचान के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने का निर्देश दिया। अलीगंज थाने में छह व्यक्तियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें से चार को गिरफ्तार किया गया है।
सीएम को रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा
मुख्यमंत्री के आदेश पर गठित एसआईटी में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ के एडीजी जोन प्रवीण कुमार शामिल हैं। यह जांच दल सात दिनों में अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को प्रस्तुत करेगा। इसके अलावा, मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर दिया गया है। जिन अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है, उनमें गौरव कुमार (बिजली विभाग), कमलेंद्र कुमार सिंह (फायर विभाग), अनिल कुमार (एलडीए) और प्रमोद पांडे (जेई-एलडीए) शामिल हैं।
सोमवार रात पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, पेट शॉप के मालिक रामकृष्ण उपाध्याय, एनिमेशन सेंटर के संचालक तूशॉक कृष्णा जायसवाल और किरायेदार सुरेश कुमार शाहू को गिरफ्तार किया। एफआईआर में नामित आरोपी धीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला की तलाश जारी है। संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था बबलू कुमार के अनुसार, पुरनिया चौकी इंचार्ज शुभम तिवारी की तहरीर पर छह नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
