लखनऊ में विवेक तिवारी मामले में पूर्व सिपाही को 10 साल की सजा
सजा का ऐलान
लखनऊ: चर्चित एप्पल मैनेजर विवेक तिवारी के मामले में लगभग आठ साल बाद सजा सुनाई गई है। जिला एवं सत्र अदालत ने पूर्व पुलिसकर्मी प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए 10 साल की कैद की सजा दी है। अदालत ने 17 सितंबर को उसे दोषी पाया था। वहीं, दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया गया।
परिवार की नाराजगी
परिवार ने जताई नाराजगी, हाईकोर्ट जाने की तैयारी
इस फैसले के समय विवेक की पत्नी कल्पना तिवारी और उनके भाई अदालत में उपस्थित नहीं थे। दोषसिद्धि के बाद कल्पना ने कहा कि वह इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं और इसे हाईकोर्ट में चुनौती देने का इरादा रखती हैं। उनका कहना है कि एक प्रशिक्षित पुलिसकर्मी द्वारा की गई फायरिंग को केवल गलती मानना उनके लिए अस्वीकार्य है।
घटना का विवरण
रात में कार रोकने की कोशिश, फिर चली थी गोली
यह मामला 29 सितंबर 2018 की रात का है। विवेक तिवारी अपनी महिला सहकर्मी के साथ कार में लौट रहे थे। गोमतीनगर विस्तार के मकदूमपुर क्षेत्र में बाइक पर गश्त कर रहे प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने उनकी कार को रुकने का इशारा किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, जब कार तुरंत नहीं रुकी, तो प्रशांत ने गोली चला दी। गोली लगने के बाद कार डिवाइडर से टकराई और विवेक को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई।
इस मामले में प्रशांत पर पहले हत्या का मामला दर्ज किया गया था, लेकिन अदालत ने उसे गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया। मामले की अंतिम बहस 6 अगस्त को पूरी हुई थी और 17 सितंबर को अदालत ने फैसला सुनाया था।
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