लखनऊ विश्वविद्यालय में अंशु चौधरी की नियुक्ति पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
हाईकोर्ट ने मांगा हलफनामा
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के पश्चात्य भारतीय इतिहास विभाग की सहायक प्रोफेसर अंशु चौधरी की संदिग्ध नियुक्ति के मामले में लखनऊ बेंच ने विश्वविद्यालय से चार हफ्ते में हलफनामा पेश करने का आदेश दिया है। यह मामला इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डॉ. अनिल कुमार यादव द्वारा दो साल पहले नियुक्ति के समय चुनौती दिए जाने से शुरू हुआ था।
हाईकोर्ट ने 12 जुलाई 2024 को लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति और रजिस्ट्रार को दो सप्ताह में संक्षिप्त हलफनामा देने का निर्देश दिया था, लेकिन पिछले 26 महीनों से विश्वविद्यालय ने यह हलफनामा प्रस्तुत नहीं किया। अंशु चौधरी, लखनऊ विश्वविद्यालय के एडमिशन इंचार्ज और लखनऊ यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनित्य गौरव की पत्नी हैं। अधिवक्ता गिरीश तिवारी ने न्यायमूर्ति पंकज भाटिया को बताया कि अनित्य गौरव के प्रभाव के कारण विश्वविद्यालय ने उच्च न्यायालय को हलफनामा नहीं दिया।
अनित्य गौरव की पीएचडी थीसिस भी विवादों में है और उनके प्रमोशन को लेकर कई चर्चाएं चल रही हैं, फिर भी पूर्व कुलपति आलोक राय ने इस पर कोई जांच नहीं की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि डॉ. अनिल कुमार यादव की शिकायत के बाद राजभवन से लखनऊ विश्वविद्यालय को पत्र भेजा गया था, लेकिन विश्वविद्यालय ने इस मामले में क्या कार्रवाई की, इसकी जानकारी नहीं दी जा रही है। इसके अलावा, अंशु चौधरी की पीएचडी, ओबीसी क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट, और अन्य दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
अनित्य गौरव के अध्यक्ष होने के कारण लखनऊ विश्वविद्यालय से मांगी गई आरटीआई का जवाब भी याचिकाकर्ता को नहीं मिल रहा है। न्यायालय ने आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को विपक्षी पक्ष के अधिवक्ताओं को इस आदेश की जानकारी लिखित रूप में देनी होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि विपक्षी पक्ष की ओर से अभी तक कोई काउंटर हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है। कोर्ट ने उन्हें काउंटर हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद मामला पुनः सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
