लखनऊ हाईकोर्ट का निर्णय: आर्य समाज मंदिर में विवाह प्रमाणपत्र नहीं है वैध
हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
UP News: लखनऊ खंडपीठ ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा कि केवल आर्य समाज मंदिर से जारी विवाह प्रमाणपत्र को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैध विवाह के रूप में नहीं माना जा सकता। वैध हिंदू विवाह के लिए आवश्यक वैवाहिक संस्कारों का संपन्न होना भी आवश्यक है।
बर्खास्तगी का आदेश निरस्त
न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने यह टिप्पणी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के अधिकारी रोहित पांडेय की बर्खास्तगी के आदेश को निरस्त करते हुए की। पांडेय को उनकी वैवाहिक स्थिति के संबंध में गलत जानकारी देने के आरोप में सेवा से हटाया गया था।
पांडेय की याचिका पर सुनवाई
अदालत ने रोहित पांडेय द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने 28 अप्रैल 2022 के सेवा से हटाने के आदेश को चुनौती दी थी। यह कार्रवाई सुचेता तिवारी की शिकायत के आधार पर शुरू हुई, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने 2007 में एक आर्य समाज मंदिर में पांडेय से विवाह किया था। अधिकारियों ने इस विवाह को वैध मानते हुए निष्कर्ष निकाला कि पांडेय ने बाद में सेवा में नियुक्ति के समय स्वयं को अविवाहित बताकर गलत जानकारी दी।
विवाह से इनकार
पांडेय ने इस विवाह से इनकार करते हुए कहा कि आवश्यक हिंदू वैवाहिक संस्कार, जिसमें सप्तपदी भी शामिल है, संपन्न होने का कोई प्रमाण नहीं है। उन्होंने एक आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान सुचेता तिवारी के बयान का भी हवाला दिया, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि विवाह हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न नहीं हुआ था।
