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लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में भगदड़: सात महिलाओं की मौत, 19 घायल

बिहार के लखीसराय में अशोक धाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी पर भगदड़ मच गई, जिसमें सात महिलाओं की जान चली गई और 19 लोग घायल हुए। घटना का कारण एक बिजली का पोल गिरने की अफवाह बताई जा रही है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया है, लेकिन स्थानीय लोगों ने सुरक्षा में कमी का आरोप लगाया है। जानें इस घटना की पूरी जानकारी और मृतकों की पहचान।
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लखीसराय में भगदड़ की घटना


बिहार के लखीसराय स्थित अशोक धाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी के अवसर पर सुबह भगदड़ मच गई, जिसमें सात महिला श्रद्धालुओं की जान चली गई। लखीसराय के जिला मजिस्ट्रेट शैलेंद्र कुमार ने इस घटना की पुष्टि की है। इस भगदड़ में 19 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से पांच की हालत गंभीर बताई जा रही है। श्रद्धालु जल चढ़ाने के लिए सुबह से ही लंबी कतार में खड़े थे। एक बिजली के पोल के गिरने की अफवाह के बाद भगदड़ मच गई। सभी मृतक महिलाएं हैं। डीएम और एसपी ने घटनास्थल पर कैंप किया है।


घायलों की स्थिति

डीएम ने बताया कि सभी घायलों का इलाज चल रहा है। भगदड़ के कारण मंदिर परिसर और अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई है। मृतकों के परिजनों का रोना-पीटना अस्पताल और मंदिर परिसर में मातम का माहौल बना रहा। जिला प्रशासन और स्थानीय लोग राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। एक मृतका की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।


मृतकों की पहचान

मृतकों की सूची इस प्रकार है:


1. मनमाला देवी (44), पति निरंजन कुमार, बड़हिया वार्ड 12, लखीसराय


2. रिंकू देवी (50), पति नीरज यादव, बऊटोला फरदा, मुंगेर


3. हेमलता देवी (55), पति सुरेंद्र यादव, प्रतापपुर, हलसी, लखीसराय


4. ललिता देवी (50), पति गोरेलाल यादव, प्रतापपुर, हलसी, लखीसराय


5. सविता कुमारी (35), पति रणवीर यादव, प्रतापपुर, हलसी, लखीसराय


6. सरोज देवी (65), पति जनार्दन सिंह, बकांवा भदौर, पटना


7. सावित्री देवी (49), पति मोहन यादव, चननिया, लखीसराय


भगदड़ का कारण

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भगदड़ का कारण बैरिकेडिंग के पास एक बिजली का पोल गिरना था। भीड़ के दबाव से बांस का बल्ला टूटकर पोल पर अटक गया, जिससे पोल गिर गया। इसके बाद अफवाह फैल गई कि करंट फैल गया है, जिससे लोग जान बचाने के लिए भागने लगे। इस भागदौड़ में कई लोग कुचल गए, जिनमें से सात की मौत हो गई।


पुनरावृत्ति की आशंका

यह पहली बार नहीं है जब अशोक धाम मंदिर में भगदड़ की घटना हुई है। इससे पहले 12 अगस्त 2019 को भी ऐसी घटना हुई थी। उस समय सुरक्षा के लिए लोहे के पाइप की बैरिकेडिंग की गई थी, लेकिन इस बार बांस-बल्ले की बैरिकेडिंग का सहारा लिया गया था, जो कमजोर साबित हुई।


प्रशासन की तैयारी पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि सोमवारी पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ आती है, और प्रशासन को इसकी जानकारी थी। फिर भी, सुरक्षा की तैयारी में कमी रह गई। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण यह घटना घटी है।


स्थिति सामान्य

डीएम ने बताया कि अब मंदिर परिसर में स्थिति सामान्य हो गई है और लोग जलाभिषेक कर रहे हैं। सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और घटना की जांच की जाएगी।