लोकसभा में जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण विधेयक 2026 पारित, विपक्ष का हंगामा जारी
विधेयक का पारित होना
शुक्रवार को लोकसभा में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 को बिना किसी चर्चा के पारित किया गया।
इस विधेयक के तहत जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में देरी के लिए नियमों को सख्त किया गया है। यदि जन्म या मृत्यु की पंजीकरण में एक साल से अधिक की देरी होती है, तो जिला मजिस्ट्रेट या उपमंडलीय मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा। दो साल से अधिक की देरी की स्थिति में, पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही किया जाएगा।
पहले, एक साल बाद किसी भी समय जिला मजिस्ट्रेट या उपमंडलीय मजिस्ट्रेट का आदेश ही पर्याप्त था, और दो साल से अधिक के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं था।
दोपहर 12 बजे कार्यवाही फिर से शुरू होने पर, विपक्षी सदस्य 20 जुलाई को संसद भवन के पास प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी तय करने की मांग करते हुए हंगामा करने लगे। समाजवादी पार्टी के सदस्य अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले पर भी शोर मचाते रहे।
पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने विधायी दस्तावेज को पटल पर रखा और हंगामा कर रहे सदस्यों से सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की, लेकिन शोरगुल जारी रहा।
इस दौरान, उन्होंने गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से विधेयक पेश करने को कहा। विधेयक पेश होने के बाद, उन्होंने चर्चा के लिए सदस्यों को बुलाया, लेकिन किसी ने भी अपनी बात नहीं रखी।
इसके बाद, श्री सैकिया ने श्री राय को विधेयक पारित करने का प्रस्ताव करने की अनुमति दी, और विपक्षी सदस्यों के शोरगुल के बीच विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्षी सदस्यों ने इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा में भाग नहीं लिया और वे बाहर जाकर कहेंगे कि विधेयक बिना चर्चा के पारित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष सहयोग नहीं कर रहा है। सरकार आगे भी विधेयक लाएगी, और यदि विपक्ष फिर से हंगामा करेगा, तो यह जनता के लिए ठीक नहीं होगा।
अंत में, श्री सैकिया ने विपक्षी सदस्यों से कहा कि उनके सहयोग के बिना विधेयक पारित करना पड़ा, और यह परंपरा ठीक नहीं है। उन्होंने सदस्यों से अपने स्थानों पर जाने और कार्यवाही में सहयोग करने का अनुरोध किया।
जब उनकी अपील का कोई असर नहीं हुआ, तो उन्होंने सदन की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
